खट्टा मिठा पराठा
आम का मौसम है और पूरे भारत में आम से बहुत सारे व्यंजन बनाए जाते है। महाराष्ट्र में गूड और आटे से 'दशमी' बनायी जाती हैं। इसी दशमी के पारंपरिक रूप को थोडा सा अलग रूप देते है।
खट्टा मिठा पराठा बनाने के लिए सामग्री चाहिए,
सामग्रीः एक कटोरी गेहूँ का आटा,एक कप आम का पल्प, आधा कप दही, आधा कप शक्कर, दो टेबल स्पून तील, चार टेबल स्पून देसी घी, नमक स्वादानुसार।
१) एक बाऊल में आम का पल्प लिजिये।
२) आम के पल्प में दही, शक्कर, तील, नमक और दो चम्मच घी अच्छे से मिलाईये।
३) उपर बाऊल में दिखायी दी रही है वो सारी चिजे शक्कर पिघलने तक मिक्स कीजिये।
४) आम के मिश्रण में धीरे धीरे आटा मिलाईये। मैंने कटोरी के हिसाब से आटा दिया है लेकीन कटोरी का आकार एक जैसा नहीं होता इसलिए उस मिश्रण के हिसाब से आटा मिलाईये और डो बना लिजिये।
५) गूँथा हुआ आटा पंद्रह-बीस मिनट के लिए गिला कपड़ा ढककर रख दिजिये।
६) बीस मिनट के बाद आटे को फिर से गूँथ लिजिये।
७) गूँथे हुए आटे के छोटे छोटे गोले बना लिजिये।
८) एक गोला लेकर रोटी की तरह बेल लिजिये। बेलते समय ध्यान रखिये की पराठे जैसा ज़ाडा बेलिये, रोटी जैसा पतला मत बेलिये।
९) गर्म किए हुए तवें पर पराठा सेकीयें। सुनहरा होने पर पराठे को दोनों तरफ से घी लगाईये।
१०) गरमागरम खट्टा मिठा पराठा घी, आचार, दही या चटणी के साथ परोसिये।
खट्टा मीठा पराठे को आप 'आम का पराठा' भी कह सकते है।
मेरी बहुत सारी सहेलीयाँ एक ही बात से परेशान होती है की, रोज़ सुबह नाश्तें में क्या बनाए। आम का मौसम है तो क्यूँ ना हम अलग सा नाश्ता बनाए। ट्राय कर के देखिए, आप को जरूर पसंद आएगा। अच्छा लगे तो लिखकर जरूर बताईये।
महाराष्ट्र की बोलीभाषा में आम से जुड़ी कुछ पंक्तियाँ है,
'कैरी तुटनी, खड़क फुटना
झुयझुय पानी वहाय वं'
इस पंक्ती का मतलब है, ' आम गिरा (टूटा), पत्थर टूटा, झिलमिल के पानी बहता गया।'
इस पंक्तीयों में बहुत ही गहरा अर्थ छिपा है।
'कैरी टुटने' का मतलब बेटी को शादी कर के विदा करना यानी पिताजी से दूर जाना है। 'पत्थर टूटने' का मतलब है पत्थर दिल पिताजी बेटी को विदा करते समय टूट जाता है और बहते पानी की तरह रो पड़ता है। इस गाने का भावार्थ डॉ. उषा सावंत मँडम ने बहुत खूबसूरती से विशद किया है।
©ज्योत्स्ना पाटील














































