Friday, 31 May 2019

खट्टा मिठा पराठा

         खट्टा मिठा पराठा
       
आम का मौसम है और पूरे भारत में आम से बहुत सारे व्यंजन बनाए जाते है। महाराष्ट्र में गूड और आटे से 'दशमी' बनायी जाती हैं। इसी दशमी के पारंपरिक रूप को थोडा सा अलग रूप देते है।
खट्टा मिठा पराठा बनाने के लिए सामग्री चाहिए,
सामग्रीः एक कटोरी गेहूँ का आटा,एक कप आम का पल्प, आधा कप दही, आधा कप शक्कर, दो टेबल स्पून तील, चार टेबल स्पून देसी घी, नमक स्वादानुसार।
१)  एक बाऊल में आम का पल्प लिजिये।
२) आम के पल्प में दही, शक्कर, तील, नमक और दो चम्मच घी अच्छे से मिलाईये।
३) उपर बाऊल में दिखायी दी रही है वो सारी चिजे शक्कर पिघलने तक मिक्स कीजिये।
४) आम के मिश्रण में धीरे धीरे आटा मिलाईये। मैंने कटोरी के हिसाब से आटा दिया है लेकीन कटोरी का आकार एक जैसा नहीं होता इसलिए उस मिश्रण के हिसाब से आटा मिलाईये और डो बना लिजिये।
५) गूँथा हुआ आटा पंद्रह-बीस मिनट के लिए गिला कपड़ा ढककर रख दिजिये।
६) बीस मिनट के बाद आटे को फिर से गूँथ लिजिये।
७) गूँथे हुए आटे के छोटे छोटे गोले बना लिजिये।
८) एक गोला लेकर रोटी की तरह बेल लिजिये। बेलते समय ध्यान रखिये की पराठे जैसा ज़ाडा बेलिये, रोटी जैसा पतला मत बेलिये।
९) गर्म किए हुए तवें पर पराठा सेकीयें। सुनहरा होने पर पराठे को दोनों तरफ से घी लगाईये।
१०) गरमागरम खट्टा मिठा पराठा घी, आचार, दही या चटणी के साथ परोसिये।
खट्टा मीठा पराठे को आप 'आम का पराठा' भी कह सकते है।
मेरी बहुत सारी सहेलीयाँ एक ही बात से परेशान होती है की, रोज़ सुबह नाश्तें में क्या बनाए। आम का मौसम है तो क्यूँ ना हम अलग सा नाश्ता बनाए। ट्राय कर के देखिए, आप को जरूर पसंद आएगा। अच्छा लगे तो लिखकर जरूर बताईये।
           महाराष्ट्र की बोलीभाषा में आम से जुड़ी कुछ पंक्तियाँ है,
'कैरी तुटनी, खड़क फुटना
झुयझुय पानी वहाय वं'
इस पंक्ती का मतलब है, ' आम गिरा (टूटा), पत्थर टूटा, झिलमिल के पानी बहता गया।'
इस पंक्तीयों में बहुत ही गहरा अर्थ छिपा है।
'कैरी टुटने' का मतलब बेटी को शादी कर के विदा करना यानी पिताजी से दूर जाना है। 'पत्थर टूटने' का मतलब है पत्थर दिल पिताजी बेटी को विदा करते समय टूट जाता है और बहते पानी की तरह रो पड़ता है। इस गाने का भावार्थ डॉ. उषा सावंत मँडम ने बहुत खूबसूरती से विशद किया है।

©ज्योत्स्ना पाटील
              

Wednesday, 29 May 2019

मसूर टोस्ट (चटपटा टोस्ट)

            मसूर टोस्ट (चटपटा टोस्ट)
     
 चाय के साथ टोस्ट खा कर आप बोअर हो गये है तो चलिए, बनाते है कुछ अलग सा। मैं आशा करती हूँ की आप को मसूर टोस्ट जरूर पसंद आयेगा।
मसूर टोस्ट बनाने के लिए प्लेट में रखी हुई सामग्री चाहिए,
सामग्रीः छःह टोस्ट, एक कटोरी मसूर की दाल, दो-तीन हरी मिर्च, चार पाँच कलियाँ लहसून, छोटा टुकडा अदरक का, हरा धनिया, एक टी स्पून हल्दी, एक टी स्पून जिरा, नमक स्वादानुसार, तीन टेबल स्पून तेल।
प्लेट सजाने के लिए प्याज की रिंग्ज, टमाटर स्लाईस।

विधीः
१) मसूर की दाल रातभर पानी में भिगोईये।
२) सुबह मसूर की दाल में से पानी निकालिये।
३) भिगोई हुई मसूर की दाल में हरी मिर्च, लहसन, अदरक, हरा धनिया, जिरा, हल्दी, नमक डालकर पीस लिजिये।
४) टोस्ट के एक तरफ से पिसा हुआ मसूर दाल का मिश्रण अच्छे से कोट कीजिये।


५) एक पँन गँस पर रखकर गर्म कर लिजिये।
६) पँन में एक टेबल स्पून तेल डालिये।
७) मिश्रण लगायी हुई टोस्ट की बाजू पँन में निचे की तरफ रखिये।
८) टोस्ट को लगाया हुआ मिश्रण अच्छे से पकने के बाद पलट दिजिये।
९) टोस्ट की दुसरी बाजू को मिश्रण लगाया नहीं है इसलिए टोस्ट पलटने के बाद तुरंत प्लेट में निकालिये।
१०) गरमागरम मसूर टोस्ट दही, चटणी, आचार या सॉस के साथ परोसिये।
११) गरमागरम मसूर टोस्ट चाय के साथ भी खा सकते हो।

           मेरे वर्धा के किचन में बहुत ही कम सामग्री है इसलिए मैने प्याज की रिंग्ज और टमाटर स्लाईस के साथ मसूर टोस्ट परोसा है।
मसूर टोस्ट यह झट से बननेवाला स्नँक्स आप को जरूर पसंद आएगा क्योंकी इस की टेस्ट का मिक्स कॉम्बिनेशन तिखा और मीठा है।
मसूर टोस्ट एक तरफ से क्रंची और दूसरी तरफ से स्मूथ टेक्चर भी सब को पसंद आता है।
टीपः मसूर टोस्ट मैंने मसूर दाल से बनाया है लेकीन आप घर में जो भी दाल (चने की दाल, मूँग दाल, उडद दाल) उपलब्ध हो, उसी से चटपटा टोस्ट स्नँक्स बना सकते हो।

©ज्योत्स्ना पाटील

Tuesday, 28 May 2019

आज थोडीसी बातें

               आज थोडीसी बातें
   
          मेरे दोनों ब्लॉग पढ़ने वाले सभी पाठकों को मेरा,
सविनय प्रणाम।
               आप सभी पाठकों ने मेरा हौसला बढ़ाया इसलिए मैं आप सभी का शुक्रिया अदा करती हूँ।
            आज के ग्लोबल युग में बहुत सारी रेसिपीज चीज, बटर, क्रीम्स, ड्रायफ्रूट्स और  सॉसेस से बनती है। महँगी चीजें से बनायी हुई रेसिपी से बहुत सारी बहनें बोअर हो गयी थी। इसलिए सिंपल, कम सामग्री से बनायी हुई झटपट रेसिपी चाहिए यही सोचकर मैंने रेसिपी से रिलेटेड ब्लॉग लिखना शुरू किया।
           रेसिपी ब्लॉग में सिर्फ रेसिपी लिखना यही मेरा मकसद नहीं है। रेसिपी के साथ कुछ जुड़ी हुई यादे लिखना और आप को भी रेसिपी बनाते हुए अपनी अपनी यादों से तरोताज़ा करके खुशी से खाना बनाने के लिए तैयार करना ताकि आप भी मनपसंद खाना बना सकें।
          सभी पाठकों को मैं कहना चाहती हूँ की आप नये तरीकें से रेसिपी बनाते वक्त एक बात ध्यान में रखिए की नयी रेसिपी थोडीसी ही बनाए। स्वाद अच्छा लगे तो दोबारा बना सकतें हो। फिलहाल इतना ही। कल मिलते है एक नयी सिम्पलसी रेसिपी के साथ। 

Sunday, 26 May 2019

धर्मेश की रेसिपी

          धर्मेश की रेसिपी
     
        आज की रेसिपी मैं धर्मेश को डेडिकेट करती हूँ। पंद्रह सोलह साल पहले की बात हैं। तब मैं दिवाली की और गर्मी की छुट्टीयों मे बच्चों को लेकर गोवा जाती थी। गोवा के साखलीम गाँव में हम रहते थे और हमारी कंपनी साखलीम से बारह कि. मी. पर पिसुर्लेयम के पास थी। हम सब दोपहर का खाना कंपनी में ही करते थे। कंपनी में खाना बनाने का काम बिहार से आया हुआ कूक धर्मेश करता था। धर्मेशने बनाई हुयी सब्जी हम सब बड़े चाव से खाते थे। आज भी बच्चों को गोवा की याद आते ही मुझे कहतें है, " मम्मी, बिहारी बाबू की सब्जी बनाओ।"
       चलिए, बनाकर देखते है, बिहारी बाबू की रेसिपी।
रेसिपी के लिए प्लेट में रखी हुयी सब्जीयाँ लिजिये।
धर्मेश की रेसिपी के लिए सामग्री चाहिए ,
तीन या चार प्याज़, दो आलू, दो टमाटर, पत्ता गोभी, एक टिंडा, एक हरी मिर्च, एक टेबल स्पून गरम मसाला, एक टेबल स्पून लाल मिर्च पाउडर, चुटकीभर हल्दी, एक टी स्पून राई, एक टी स्पून जीरा, आधा टी स्पून हिंग पाउडर, नमक स्वादानुसार, दो टेबल स्पून तेल      
१) प्याज के छिलके निकालिये।
२) आलू, टमाटर, टिंडा(ढेमसे), बंदगोबी को पानी से धोईये।
३) प्रेशर कुकर में प्याज, आलू, टमाटर, टिंडा, बंदगोबी, हरी मिर्च, हल्दी, नमक,एक टेबल स्पून तेल, आधी कटोरी पानी डालिये और दो सिटीयाँ होने तक गँस पर रखिये।
४) दो सिटीयाँ होने के बाद गँस बंद कीजिये और कुकर को ठंडा होने दिजिये।
५) प्रेशर कुकर में से सब्जीयाँ प्लेट में निकालिये।
६) टमाटर के छिलके निकालिये।
७) प्याज, आलू, बड़े टुकडों में काट लिजिये।
८) टिंडा के टुकडें कीजिये और बीज निकालिये।
९) बंदगोबी के ही बड़े बड़े टुकडे कर लिजिये।
१०) गँस पर कड़ाही रखिये और गर्म होने दिजिये।
११) कड़ाही गर्म होने पर दो बड़े चम्मच तेल डालिये।
१२) तेल गर्म होने पर राई, जिरा, हिंग पाउडर, अदरक लहसन का पेस्ट डालिये, पकाये हुए प्याज के और टमाटर के टुकडे डालिये, दो मिनट तक भूनिये।

१३) प्याज, टमाटर भूनने के बाद गरम मसाला, लाल मिर्च पाउडर, धना पाउडर अपने स्वादानुसार डालिये।
१४) सारे मसाले अच्छे से भूनने के बाद आलू, बंदगोबी, टिंडा डालिये और कुकर में बचा हुआ दो चम्मच पानी डाल दिजिये।
१५) सब्जी पकाते समय नमक डाला था इसलिए जरूरत होगी तो नमक डालना।
१६) हरा धनिया डालिये और गरमागरम सर्व्ह कीजिये।
     धर्मेश की रेसिपी धर्मेश की याद दिलाती हैं।उसके हाथ से बनायी हुयी सब्जी की टेस्ट कुछ अलग ही थी। आज भी वो स्वाद हम भूले नहीं।
टिपः धर्मेश की सब्जी में टिंडा नहीं था, मैने बचा हुआ एक टिंडा धर्मेश की सब्जी में डाल दिया।

©ज्योत्स्ना पाटील

Thursday, 23 May 2019

स्टफ्ड़ टिक्की

            स्टफ्ड़ टिक्की
       गर्मी के दिन है और आम का मौसम है तो आम से ही टिक्की बनाते है। इस टिक्की की खासियत यह है की, तिखी, मीठी टेस्ट अलग ही रूची लाती है। चलिये, लग जाते हैं किचन में अलग रेसिपी के साथ।
स्टफ्ड़ टिक्की के लिए सामग्री चाहिये,
सामग्रीः  दो आलू, पाव कटोरी साबुदाना, लाल मिर्च पाउडर, नमक, दो टेबल स्पून देसी घी।
स्टफिंग के लिए सामग्रीः एक आम, दो चम्मच खोया।
बनाने की विधीः
१) साबुदाना पाँच छःह घंटे भिगोईये।
२) आलू को उबालिये और छिलका निकालिये।
३) आलू अच्छे से मँश कर लिजिये।
४) मँश किया हुआ आलू, साबुदाना, लाल मिर्च पाउडर, नमक अच्छे से मिक्स कर के छोटे छोटे गोले बना लिजिये।
५) आम का छिलका निकालिये और बारीक टुकड़ो में काट लिजिये।
         प्लेट में आलू साबुदाना लाल मिर्च पाउडर नमक का मिश्रण, आम के टुकडे और खोया रखा हुआ है।
६) आम के टुकडों को खोया में मिला दिजिये।
७) आलू साबुदाना के मिश्रण का एक गोला लेकर हाथ पर ही थपथपातें हुए गोल रोटी बनाईये, रोटी में आम, खोया का मिश्रण भर दिजिये। हल्के हाथों से गोल टिक्की बनाईये।
८) पँन गर्म कीजिये।
९) गर्म पँन में एक चम्मच घी डालिये।
१०) घी डालने के बाद बनायी हुयी टिक्की पँन में रखिये और दोनों तरफ से सुनहरा होने तक शँलो फ्राय किजिए।
टीपः स्टफ़्ड टिक्की के लिए खोया नहीं है तो कोई बात नहीं, आप आम के टुकडों की स्टफिंग भर सकते हैं। घी की जगह तेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
          कम साधन सामग्री से ही अच्छी और स्वादिष्ट रेसिपी आप बना सकते है। एक दो चीज नही हैं तो कोई बात नहीं। आप दूसरा विकल्प आप के रूचीनुसार चून सकते है। चलिये नयी नयी रेसिपी बनाकर आप सबके दिल में जगह पाईए, यही शुभकामनाएँ।

©ज्योत्स्ना पाटील 

Wednesday, 22 May 2019

छोले वडा

              छोले वडा
            आज की रेसिपी मैं मेरी छोटी बहन सौ. पूजा मराठे को डेडिकेट करती हूँ। मेरी छोटी बहन गर्मी की छुट्टीयों में जब भी आती थी तब वो पाववडा, वडापाव खाने की फर्माईश करती थी। इसलिए आज की 'छोले वडा' रेसिपी उसी के लिए।

१) काबुली चने (छोले) रातभर पानी में भिगोईये। उसी पानी में नमक, तेल के साथ नर्म होने तक उबालिये।
२) पँन में तेल गर्म कर के कटा हुआ प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनिये। टमाटर, अदरक लहसुन पेस्ट डालिये और भूनिये।
३) कटा हुआ कच्चा आम डालिये, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, हल्दी, नमक मिलाईये और मसाला तेल छोड़ने लगे तब तक भूनिये।
               ऊपर प्लेट में रखा हुआ मसाला और उबले हुए चने रखे हैं उसी तरह बनाने की कोशीश किजिए।
४) उबले हुए छोले को अच्छी तरह से मसल लिजिये और बनाया हुआ मसाला मिक्स कर दिजिये।
५) एक बाऊल में मैदा, नमक और पानी का घोल बना लिजिये।
६) ब्रेड की स्लाईस पानी में भिगोईये और ब्रेड की दोनों हाथों से दबाकर पानी निचोड लिजिये।

            ७) ऊपर के फोटो में दिखाया है उसी तरह से ब्रेड की स्लाईस पर छोले मसाला का मिश्रण रखीये।
           ८) ब्रेड की स्लाईस को चारो तरफ से मोड दिजिये और धीरे से बंद कर दिजिये (ब्रेड टूटना नहीं चाहिये) ।
९) मैदे के घोल में डूबाकर वडे को कोट कर लिजिये।
१०)कड़ाही में तेल गर्म कर लिजिये।
तेल गर्म होनें पर मैदे से कोट किया हुआ वडा तलिये। सुनहरे होने पर निकालिये।
११) गरमागरम छोले वडा मनपसंद चटणी या सॉस के साथ परोसिये।
     आज की रेसिपी 'गुड्डी' के नाम।

©ज्योत्स्ना पाटील 

Monday, 20 May 2019

खिचड़ी की टिक्की

 खिचड़ी की टिक्की 

आज की रेसिपी मेरे देश के भूखे पेट सोनेवाले बीस करोड लोगों को समर्पित करती हूँ। जब मैं रेसिपी बताऊँगी तब आप समझ जाएँगे।
 चलिये, सुबह हो गयी और सभी को नाश्ता बनाने के लिए किचन में जा कर कुछ तो बनाना ही हैं। आज हम ऐसा नाश्ता बनाएँगें की किसी ने सोचा ही नहीं होगा। वैसे तो सभी को पता हैं की टिक्की कैसे बनाते है लेकिन आज मैंने बनायी हुयी टिक्की किस व्यंजनों से बनी है। यह खोज निकालना आप का काम है। देखते है। कौन खोज सकता/ सकती है।
आज की रेसिपी का मुख्य व्यंजन बताईये। दोपहर तक सोचिए और जवाब ढूँढिये।

       आज की रेसिपी ने आप को सोचने पर मज़बूर किया है। अच्छी बात है। सोचना मस्तिष्क के लिए अच्छा होता है। आप जवाब के नज़दिक पहुँच गये इस बात की खुशी हुयी।
आप ने 'खिचडी' जवाब सहीं दिया है लेकीन भूखे पेट से जुड़ी हुयी रेसिपी है तो यह खिचडी बाँसी (खाने के बाद बची हुयी रात की खिचडी) से मैंने टिक्की बनायी। जिस देश में करोडों लोग भूखे पेट सोते है, वहाँ के लोगों को बचा हुआ खाना कूड़ेदान में डालना शोभा नहीं देता। बची हुयी बाँसी खिचडी से टिक्की बनाने का तरीका जान लेते है।
ऊपर प्लेट में बाँसी खिचडी, फ्रेश ब्रेड क्रम्स (तीन ब्रेड की स्लाईस मिक्सी में पीस ली), प्याज, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, नमक रखा हुआ है। टिक्की शँलो फ्राय करने के लिए तेल।
१) बाँसी खिचडी मे फ्रेश ब्रेड क्रम्स मिलाईये।२) खिचडी, ब्रेड क्रम्स के मिक्चर में प्याज, लाल, मिर्च पाउडर, हल्दी और नमक मिला दिजिये।
३) बनाए हुये मिक्चर के छोटे छोटे गोले बनाकर गोलाकार, तिकोनाकार, चौकाराकार में टिक्की बनाए।
४) गँस पर पँन गर्म कीजिये।
५) गर्म पँन पर एक चम्मच तेल डालकर टिक्की को दोनों तरफ से शँलो फ्राय किजिए।
६) चटणी या सॉस के साथ परोसिये।
टिपः आप टिक्की में हरा धनिया भी डाल सकते है।
          अपने देश के गरीब लोगों के बारे में सोचिए और खाना बरबाद मत होने दिजिये। बचा हुआ खाना फ्रीज में रखने के बजाए तुरंत(दोपहर का रात को, रात का सुबह) नयी रेसिपी बनाकर खा लिजिये।

©ज्योत्स्ना पाटील

Sunday, 19 May 2019

गपशप

         गपशप

आज रेसिपी के बदले सिर्फ बातें।
 मेरा ब्लॉग पढ़ने वाले सभी पाठकों को मेरा सादर प्रणाम।
आप सभी ने मेरा हौसला बढ़ाया इसलिए दिल से शुक्रीया।
आज फास्ट फूड के ज़माने में सात्विक और स्वाद भरा खाना पिछे छूटता जा रहा था। लेकिन सात्विक भोजन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं, यह सोचकर फिर से सात्विक भोजन की विशेषता जानकर और सब को सात्त्विक भोजन के बारे में सजग करने के लिए मैने ब्लॉग लिखना शुरू किया और आप सभी ने फोन पे, व्हाट्सएप पे मेसेज के द्वारा मेरा हौसला बढाया इसलिए ब्लॉग पर रेसिपी आप से शेअर करने में मजा आ रहा हैं।
       रेसिपी से जुडी यादें मैं आप से शेअर करती रहुँगी। आप के भी कुछ अनुभव हो तो आप मुझसे जरूर शेअर किजिए।
       मैंने बताए हुए तरीकें से बनाया हुआ व्यंजन सही हुआ या बिघड गया तो बेझिझक कमेंट्स बॉक्स में या मेरे मेल पर मेल कर के लिखकर बता सकते हैं। मैं आप के सवाल का विस्तार से जवाब देने की कोशीश करूँगी। आप को कुछ खास रेसिपी के बारे में जानकारी चाहिए तो लिखकर बताईये। मैं मेरी तरफ से पूरी कोशीश करूँगी की आप को सही जानकारी देने की।
         आज फिर यात्रा कर रही हुँ इसलिए रेसिपी कल बनाकर खिलाऊँगी। आज आप से खाली गपशप करने का मन हुआ।
         चलिये, कल मिलते हैं स्वादभरी डिश के साथ। धन्यवाद।

Saturday, 18 May 2019

मीठा चीला (गोड धिरडे)

मीठा चीला (गोड धिरडे) 

कल रात को मीठा चीला बनाने की रेसिपी आप ने जान ली। आज मैं मीठा चीला को फोटो के जरीए कैसे बनाना चाहिए इस बारे में अधिक विस्तार से दर्शाती हूँ।
आज मैं दो ही चीला बनाने वाली हूँ इसलिए उसी हिसाब से मैने प्लेट में सामग्री रखी है।
           गूड और पानी का घोल (मिश्रण) बना लिजिये।
गूड और पानी के घोल में तिल, नमक, और गेहुँ का आटा मिलाईये।
ऊपर प्लेट में रखा हुआ बँटर चीला बनाने के लिए तैयार है।
पँन गर्म होने पर एक चम्मच घी या तेल डालिये और बँटर को डोसे की तरह फैला दिजिये। दोनों तरफ से सुनहरे होने तक पकाईये और गरमागरम परोसिये।

मीठा चीला बनाना जितना आसान लगता हैं उतना आसान नहीं हैं। मीठा चीला पहली बार बनाते समय छोटे छोटे आकार के बनाईये क्योंकी उसे पलटाने में दिक्कत आती हैं। पलटते समय टूट जाता हैं। मीठा चीला को पलटने की ट्रीक्स समझना जरूरी होता हैं। चीला टूट भी गया तो कोई बात नहीं, उसका स्वाद अच्छा ही लगता हैं। आप मीठा चीला बनाने की कोशीश जारी रखीए। 'practice makes man perfect' इस उक्ती के अनुसार आचरण करने से आप माहीर हो ही जायेंगे।
        महाराष्ट्रा के धुलिया जिले में यह रेसिपी संक्रांत के दूसरे दिन (करी दिन,१५जनवरी) के त्योहार की स्वीट डीश हैं। आप भी चखिए और दूसरों को भी खिलाईये।

©ज्योत्स्ना पाटील
     

मीठा चीला (गोड धिरडे) रेसिपी

               मीठा चीला (गोड धिरडे)
           गर्मी के दिन, बच्चों की छुट्टीयाँ चल रहीं हैं तो घर में उछलकूद करनेवाले बच्चों को रोज़ नाश्ते के लिए अलग सा और पौष्टिक नाश्ता बनाना हर माँ के लिए सोचना पडता हैं। चलिये आज सोचने के बजाए तुरंत नाश्ता बनाने में जुट जाईये।
         मीठा चीला बनाने के लिए बहुत ही कम घरेलू चीजे से बनता हैं।
मीठा चीला बनाने के लिए सामग्री चाहिए,
सामग्रीः                                                                                                         
एक कटोरी गूड, एक कटोरी गेहुँ का आटा, एक टेबल स्पून तील, नमक,तेल।
विधीः
१) गूड में पानी डालिये और पिघलने दिजिये।
२) गूड पिघलने के बाद छानिये।
३) गूड के पानी (घोल) में गेहुँ का आटा मिलाईये और बँटर बना लिजिये।
४) बँटर में चुटकीभर नमक डालिये।
५) बँटर में तील मिलाईये।
६) गँस पर पँन गर्म कीजिये।
७) गर्म पँन पर एक चम्मच तेल चारों तरफ फैला दिजिये।
८) आधी कटोरी बँटर कटोरी की सहायता से डोसे के जैसा फैला दिजिये।
९) दो मिनट बाद पलटा दिजिये।
१०) दोनों तरफ से सुनहरा होनें पर गरमागरम परोसिये।
११) दही, घी, आचार और तील की चटणी के साथ मीठा चीला परोसिये।
टिपः मीठा चीला के ऊपर चॉकलेट कद्दूकस कर के बच्चों को परोसिये।
          मीठा चीला बच्चों को जरूर पसंद आएगा और बडे चाव से खाएँगे।

©ज्योत्स्ना पाटील 

Thursday, 16 May 2019

ब्रेड पकौडा

ब्रेड पकौडा


आज शाम का चटपटा, दो मिनट में बननेवाला स्नँक्स।
चार दिनों से घूम फिरकर फिर अपने नासिक के घर पहुँच गये। आज के स्नँक्स की तैयारी कर लेते हैं। आप भी देख लिजिये यह सामग्री घर में है या नहीं।
चणे के आटे में डाली हुयी सभी चीजें घरेलू हैं। चलिये मिलते हैं शाम को तैयार रहिये स्नँक्स खानें के लिए।
                  ब्रेड पकौडा
बच्चे जब स्कूल से या खेलकर घर आते हैं तो कहतें हैं,"मम्मी, जोर की भूख लगी हैं। मुझे खानें को दो।" बच्चों को झटपट स्नँक्स बनाकर खिलाते हैं।
ब्रेड पकौडा के लिए सामग्री चाहिये,
सामग्रीः चार ब्रेड की स्लाईस, एक कटोरी चणे का आटा, एक टेबल स्पून लाल मिर्च पाउडर, आधा टी स्पून हल्दी, आधा टी स्पून हिंग पाउडर, एक टी स्पून अजवाईन, चुटकीभर बेकींग सोडा (खाने का सोडा), नमक स्वादानुसार, तलने के लिए तेल।
विधीः
१) ब्रेड की स्लाईस को चार भागों में तिकोनाकार में काट लिजिये।
२) चणे के आटे में पानी डालकर बँटर बना लिजिये।
३) बँटर में लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, नमक, अजवाईन मिलाकर फेट लिजिये।
४) बटर में बेकींग सोडा मिलाईये।
५) गँस पर कडाही रखकर गर्म कीजिये।
६) गर्म कडाही में तलने के लिए तेल डालिये और गर्म होने दिजिये।
७) तेल गर्म कीजिये। बँटर (घोल) में ब्रेड की स्लाईस डुबो कर गर्म तेल में हल्के सुनहरे होने तक तलिये।
८) नारियल की चटणी, इमली की चटणी, सॉस या दही के साथ गर्म परोसिये।
         
            
बच्चों को तली हुयी चीजे खाना अच्छा लगता हैं लेकिन बड़े या हेल्थ कॉन्शस लोग तली हुयी चीजे खाने से परहेज करते हैं तब आप बेसन का घोल थोडा सा गाढ़ा बनाईये और ब्रेड की स्लाईस के उपर बँटर (बेसन का गाढ़ा घोल) फैला दिजिये और पँन गर्म कर के एक चम्मच तेल डालिये। पँन में स्लाईस रखकर दोनों तरफ से शँलो फ्राय कर लिजिये और मनपसंद चटणी, सॉस के साथ परोसिये।

©ज्योत्स्ना पाटील



Tuesday, 14 May 2019

चवई की फल्ली (चवळीची भाजी)

चवई की फल्ली (चवळीची भाजी)
      आज की सब्जी बहुत ही कम और घर में आसानी से मिलनेवाली चीज़ों से बनायी हैं। चवई की फल्ली की सब्जी बनाने के लिए ज्यादा मसाले डालना उचित नहीं होता क्योंकी ज्यादा मसाले डालने से मूल सब्जी का स्वाद बदल जाता हैं। इसलिए कुछ सब्जीयाँ ऐसी होती हैं की उनका स्वाद बरकरार रखने के लिए कम मसाले से ही बनानी चाहिए।
        आज की रेसिपी की सामग्री में तेल और एक चीज (अमूल चीज नहीं, चीज मिन्स व्यंजन) मैने रखी नहीं हैं। आप को वह चीज ढुँढनी हैं। चलिये ढूँढिये और ढुँढते ढुँढते चवई की सब्जी बनाते हैं।
१) चवई की फल्ली के दानें निकालिये, कोमल फल्ली को छोटे छोटे टुकडों में काटिये।
फल्ली के टुकडें ओर दानों को मिक्स कर दिजिये।
२) मुँगफली के दानें भूनिये और उसकी पाउडर बना लिजिये।
३) नारियल, अदरक, लहसून की पेस्ट बना लिजिये।
४) गँस पर बर्तन रखिये और गर्म होने दिजिये।
५) गर्म बर्तन में तेल डालिये।
६) तेल गर्म होने पर जिरा, हिंग पाउडर, कढीपत्ता, नारियल, अदरक, लहसून पेस्ट डालिये और दो मिनट तक भूनिये।
७) पेस्ट सुनहरे रंग की होने पर गरम मसाला, लाल मिर्च पाउडर और हल्दी डालिये हिलाते हुये आधे मिनट तक तलिये।
८) सारे मसाले अच्छे से मिलाईये और चवई की फल्ली डालिये और हिलाईये।
९) चवई की फल्ली मसालों में भूनने के बाद गर्म पानी डाल दिजिये।
१०) चवई की फल्ली अच्छे से पकने दिजिये और मुँगफली की पाउडर, नमक, हरा धनिया डालिये।
११) पूरी तरह से सब्जी पकने के बाद सर्व्हिंग बाऊल में निकालिये और रोटी, भाकरी, चावल के साथ परोसिये।
          चलिये चवई की फल्ली तो बन गयी और आप को सहीं उत्तर ही मिल गया होगा।

         
           ग्रेव्ही की चवई की सब्जी आप खाईये और दुसरों को भी खिलाईये।

©ज्योत्स्ना पाटील 

Monday, 13 May 2019

लाल मिर्च की चटणी

 लाल मिर्च की चटणी

आज की रेसिपी मेरी धुलिया की नणंद कविता के किचन से हैं।
                    लाल मिर्च की चटणी
चटणी के लिए सामग्री ट्रे में रखी हुयी हैं, तेल मैंने रखा नहीं हैं। चटणी के लिये तेल चाहिये इसलिए आप तेल भी सामग्री में लिजिये। मुझे पालक चिला के साथ चटणी चाहिए थी और नाश्ता कर के आगे का सफ़र तय करना था इसलिए मुझे सुबह जल्दी से काम निपटाना था। आप चटणी के लिये सामग्री अपने हिसाब से ले सकते हैं।
सामग्री नापतौल के लेने के बजाए आप अपने हिसाब से लेकर खाना बनाना हमेशा फायदेमंद होता हैं। हर एक घर के लोगों की रूची अलग अलग स्वाद की होती हैं। किसी को खानें में तेल ज्यादा चाहिए तो किसी को कम तेल चाहिए। किसी को सब्जी के अनुसार तेल की मात्रा चाहिए। हर घर का खानपान का तरीका अलग अलग ढंग का होता हैं इसलिए आप लहसुन, अदरक, प्याज, मिर्च, नमक की मात्रा लिजिये और खाना बनाईये।
विधीः १) पहले मुँगफली के दानें अच्छे से भूनिये।
२) लाल मिर्च, लहसून, नमक और भूनें हुये मुँगफली के दानें, हरा धनिया मिक्सी के जार में डालकर पीस लिजिये।
३) कड़ाही को गँस पर रखिये और गर्म कीजिये।
४) कड़ाही में तेल डालिये, तेल गर्म होने पर जिरा, कडीपत्ते डालिये और पिसी हुयी लाल मिर्च डालिये। अच्छे से मिलाईये और गँस को बंद कर दिजिये।

५) लाल मिर्च की चटणी रोटी, भाकरी, पराठा, ब्रेड, डोसा, उत्तप्पा, चिला, पुरी, बटाटेवडा, पकौड़े के साथ खा सकते हैं।

©ज्योत्स्ना पाटील

Saturday, 11 May 2019

आप्पे

आप्पे 

आज मैं आप को कल की रेसिपी के बारे में कुछ बताना चाहती हूँ ।कल की रेसिपी हैं आप्पे।
आप्पे के लिए आज रात को ही सभी  दाल और चावल पानी में भिगोईये।
आज रात की तैयारी -  आधी कटोरी चावल, आधी कटोरी चणे की दाल, आधी कटोरी मूंग दाल, पाव कटोरी उडद दाल, पाव कटोरी तुवर दाल सभी मिक्स कर के रात भर पानी में भिगने दीजिए। आज के लिए इतनी तैयारी काफ़ी हैं ।कल नाश्ते के लिए आप्पे बनायेंगे चलो, मिलते हैं कल, शुभ रात्री ।   

                           आप्पे
१) अदरक, लहसुन छीलिये।
२) हरी मिर्च धोईये और काटिये
३) रातभर भिगोईयी हुई चावल, दाल, हरी मिर्च, अदरक, लहसून, जिरा, हल्दी पाउडर, हींग पाउडर, नमक, हरा धनिया मिक्सी के जार में डालकर एक साथ पीस लिजिये।
४) पीसे हुए दाल चावल के मिश्रण को बाउल में निकालकर दो घंटे रेस्ट करने के लिये रख दिजिये।
५) दो घंटे बाद मिश्रण में बेकिंग सोडा (खानें का सोडा) मिलाईये और अच्छी तरह से मिश्रण को हाथ से फेंट लिजिये।
६) आप्पे पात्र को गँस पर रखकर गर्म किजिए।
७) गरम किया आप्पे पात्र के सातों कटोरी में एक छोटा चम्मच तेल डालिये और एक एक चम्मच मिश्रण डाल दिजिये। उस के ऊपर ढक्कन रखकर पकने दिजिये।
८) आप्पे को पलटकर दुसरी बाजू ही पकने दिजिये।
९) दोनों तरफ से सुनहरे होने के बाद आप्पे प्लेट में निकाल लिजिये।
१०) चटणी या सॉस के साथ गरमागरम आप्पे खानें का आनंद लिजिये।
     आज का पौष्टिक, स्वादभरा नाश्ता खाईये और तंदुरुस्त रहिये।

©ज्योत्स्ना पाटील 

Friday, 10 May 2019

टमाटर पराठा (ठेपला)

           टमाटर पराठा (ठेपला)
चलो, आज फिर से वर्धा के छोटेसे किचन में बनायी हुई सिम्पलसी रेसिपी का स्वाद चखतें हैं।
टमाटर पराठा बनानें के लिए सामग्री,
सामग्रीः दो टमाटर, एक बड़ी कटोरी गेहुँ का आटा,एक छोटासा प्याज, चार-पाँच लहसून की कलियाँ, एक छोटासा टुकडा अदरक,एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर, पाव चम्मच हल्दी, थोडासा बारीक कटा हुआ हरा धनिया, तील(सेसमी सीडस्), एक टी स्पून पिसी हुई शक्कर, नमक स्वादानुसार, तेल
विधीः
१) प्याज छिलकर काट लिजिये।
२) प्याज, टमाटर, लहसून, अदरक की पेस्ट बनाईये।
३) एक बर्तन में गेहुँ का आटा, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, पिसी हुई शक्कर (पिसी हुई शक्कर घर में ना हो तो टमाटर के साथ शक्कर ग्राईंड कर लिजिये), तील हरा धनिया, एक चम्मच तेल डालकर अच्छे से मिलाईये।
४) गेहुँ के आटे में टमाटर, प्याज, अदरक, लहसून की पेस्ट मिलाईये और अच्छे से आटे को गूंथिये। जरूरत पड़ी तो थोड़ा सा पानी आटे में डाल सकते हो। वैसे तो टमाटर की पेस्ट में आटा गूंथा जाता हैं। अलग से पानी डालनें की जरूरत नहीं पड़ती।
५) गुंथे हुये आटे को गीले कपड़े से ढककर पंद्रह बीस मिनट तक रखिये।
६) गुंथे हुये आटे के छोटे छोटे आकार के गोले बनाइये।
७) गोले को चपाती के जैसा गोल आकार में बेलिये और गर्म तवे पर थोड़ा सा तेल लगाकर दोनो ओर सुनहरा होने तक सेकिये।
८) टमाटर पराठा चटणी, सॉस या आचार के साथ परोसिये।
चार पाँच साल के बच्चों को पराठा आठ हिस्सों में काट कर दिजिये क्योंकी बच्चों को हाथ से रोटी या पराठा तोडनें में दिक्कत आती हैं इसलिए बच्चे मँगी, पास्ता, पिझ्झा खाना ज्यादा पसंद करते हैं।
अपने बड़े बच्चे (पती) को मत काटकर परोसिये! अरे यार मैंने ऐसे ही मज़ाक में कह दिया। कभी कभी आप के पास समय हो तो उन्हें भी पराठा काटकर प्लेट में सज़ाकर दिजिये साथ में सलाड भी दिजिये।

©ज्योत्स्ना पाटील 

Thursday, 9 May 2019

नारियल की बर्फी

     नारियल की बर्फी

आज की रेसिपी  'नारियल की बर्फी'
आप सभी ने नारियल की बर्फी शादीं या त्योहार में खायी हैं। आप ने चखी हुयी बर्फी सॉफ्ट और दो या तीन दिन ही खा सकतें है लेकिन मैंने बनायी हुयी नारियल की बर्फी दस पंद्रह दिन रूम टेंम्परेचर में डिब्बे में भरकर रख सकते हैं और बर्फी खानें का आनंद लुटा सकते हैं।
आज की रेसिपी के लिए सामग्री चाहिए,
सामग्रीःः एक कटोरी कद्दूकस किया हुआ नारियल, डेढ कटोरी शक्कर, दूध आधा कप, देसी घी दो टेबल स्पून।
बहुत ही कम और हर घर में आसानी से मिलनेवाली सामग्री है। आप सामग्री लेकर तैयार रहिये, दोपहर के समय में हम नारियल की बर्फी बनानें की विधी जानते हैं।
विधीः
१) एक थाली को थोडासा घी (चिकनाई) लगा कर अलग रखिये।
२) कड़ाही में बचा हुआ घी गर्म कीजिये
३) घी में कद्दूकस किया हुआ नारियल डालकर धीमी आंच पर भूनिये। लगातार मिलाते रहिये।
४) नारियल थोडासा भूनने के बाद दूध डालकर लगातार मिलाते रहिये।
५) दूध डालने के बाद शक्कर मिला दिजिये और लगातार मिलाते रहिये। नीचे कड़ाही को मिश्रण लगना नहीं चाहिये।
६) जब मिश्रण में जालियाँ दिखायी देने लगे और मिश्रण का रंग सुनहरा दिखायी देने लगे तब गँस बंद कर दिजिये।
७) गँस बंद करते ही कड़ाही में से मिश्रण को घी लगी हुई थाली में डालिये। मिश्रण को फैलाकर जमाईये।
८) मनपसंद आकार में काटिये और ठंडा कर के डिब्बेंं में भर दिजिये। जब चाहो तब नारियल की बर्फी का आनंद ले सकते हो।
        मीठा खाओ, मीठा बोलो और खुशहाल रहो।

©ज्योत्स्ना पाटील 

Wednesday, 8 May 2019

आज सिर्फ सुनहरी यादें

         आज सिर्फ सुनहरी यादें
 
आज गुलजारजी का एक शेर याद आ रहा हैं। गुलजारजी कहतें हैं,
मिलता तो बहुत कुछ हैं इस जिंदगी में.......
बस हम गिनती उसी की करते हैं, जो हासिल ना हो सका।
      गुलजारजी की बातों पर गौर करते हुए आज हम सिर्फ अच्छी बातों को याद करेंगे और आज का दिन बेहतर बनाएँगें।
      अच्छी बातें बहुत सी हैं लेकिन हम खानपान से जुड़ी यादों का ही ज़िक्र करेंगे।
आज मैं आप से 'पालक चीला' से जुड़ी हुई यादें शेअर करूँगी।
         बीस साल पहले की बात हैं। मेरे पती दिलिपजी गोवा में रहते थे और मैं बच्चों के साथ नासिक में रहती थी। एक दिन अखबार पढ़ रही थी तब कॉर्नर में छपें हुए विज्ञापन पर मेरी नज़र गयी। मैंने वह विज्ञापन ध्यान से पढ़ा। उसमें लिखा था,' नासिक का पहला फूड फेस्टिव्हल' फूड फेस्टिव्हल पढ़कर मेरी आँखे चौंक गयी। अरे यार, पहला 'फूड फेस्टिव्हल' और हम औरतें क्यों न शामील हो! दिमाग में घंटी बजी और तुरंत विज्ञापन में दिए हुए फोन नंबर को घुमा दिया। फोन पर बहुत सारी जानकारी हासिल करनें के बाद मैंने सोचा, 'चलो, स्टॉल बुक कर ही लेतें हैं।' स्टॉल बुक करनें के बारे में किसी को पुछूँगी तो सब कहेंगे, "क्या जरूरत पड़ी हैं तुझे? घर में खाना बनाती हैं, इतना काफ़ी नहीं हैं।" औरतों को हमेशा सुननें में मिलनेवाली इन्हीं शब्दों से मेरी कभी नहीं पटती। इसलिए न आगा देखा न पिछा तुरंत स्टॉल बुक किया और स्टॉल पर कौनसे व्यंजन रखनें चाहिये इस काम में लग गयी।
पहले दिन पँकींग की हुयी चीजें रखनी थी तो मैंने अलग अलग तरह की चटणीयाँ और नमकीन बनाकर सौ सौ ग्राम के पँकेट बनवाकर स्टॉल पर रख दिये।
         दुसरे दिन प्याज के पकौड़े, सँडविच, आप्पे, बटाटेवडा और पालक चीला बनवायें।
स्टॉल पर आनेवाले सभी खवय्ये लोग आप्पे और पालक चीला नाम सुनकर सोच में पड़ जाते थ वो पहले दोनों व्यंजनों के बारे में पुछतें और फिर ऑर्डर देते थे।
      एक पालक चीला लेनेवाले ग्राहक दो या तीन पालक चीला खा के ही जाते थे। पालक चीला खानेवालें औरत हो या आदमी सभी ने मुझसे पालक चीला कैसे बनातें हैं इस बारे में पूछकर जानकारी लेते थे।
         दो बुढ़े दोस्त शाम सात बजें स्टॉल पर आते थे और पेटभर के पालक चीला, आप्पे खाते थे। वे दोनों साथ में खाली डिब्बा लाते थे और जाते समय डिब्बे में दो प्लेट पालक चीला, आप्पे भर के ले जाते थे। एक दिन मुझसे रहा नहीं गया। मैने उन दोनों को पूंंछ लिया,"अंकल, आप यहाँ खानें के बाद भी डिब्बे मे पँक कर के पालक चीला, आप्पे क्यूँ ले के जाते हैं? पालक चीला, आप्पे ठंडा खानें में मज़ा नहीं आता।" मेरी बात सुनकर दोनों अंकल ने जवाब दिया,"बेटी, तेरे हाथ से बनाए हुए पालक चिला और आप्पे ठंडा खानें का भी एक अलग मज़ा हैं। हम दोनों दोस्त हैं, हमारे बेटे अमेरिका में रहते हैं, हम दोस्त यहाँ आकर खा सकतें हैं लेकिन हम दोनों की पत्नीयाँ घुटनें के दर्द से परेशान हैं। अपनी अपनी स्वीट हार्ट के लिए पालक चीला, आप्पे डिब्बे में भरकर ले जाते हैं। रोज़ रोज़ मेस का खाना खा कर बोअर हो गए थे। तेरे हाथ से बनाया हुआ सँडविच, पकौड़े, बटाटेवडा, पालक चीला, आप्पे खा के हम खूश हो गए।"
      उन दोनों अंकल की बात सुनकर जितना अच्छा लगा उतना बुरा ही लगा। बुरा इसलिए लगा की, बुढ़ापे मे बच्चों के बिना अकेले रहना कितना मुश्कील होता हैं फिर भी अपनी अपनी ज़िदगी जीना ही हैं क्या करे। दोनों अंकल के लिए स्वास्थ्य भरी ज़िदगी की शुभकामनाएँ दी और मैं किसी अनज़ान लोगों को खानें के जरीए कुछ पल के लिए खुशियाँ दे सकी इसलिए अपनें आप को शाबाशी दे दी।
        आप भी खाना बनातें समय जिन लोगों ने आप के खानें की तारीफ़ की हैं, उन्हीं यादों को याद कर के खाना बनाईये। आप को खाना बनाना बोअरींग नहीं लगेगा। कर के तो देखिए और अपना अनुभव बताईये।

©ज्योत्स्ना पाटील 
       

Tuesday, 7 May 2019

पालक चिला (पालक धिरडे)

पालक चिला (पालक धिरडे)
आज की रेसिपी इन्ही सामग्री से बनाएँगें। बहुत ही कम सामग्री से हेल्दी नाश्ता बनवानें की रेसिपी दोपहर में लिखूँगी तब तक आप सामग्री जुटा लिजिये। आज का व्यंजन हैं 'पालक चीला' मराठी में इसे 'पालक धिरडे' कहते हैं। चलिये, मिलते हैं दोपहर को।
           चलिये, पालक चीला बनानें के लिए
१) पहले पालक अच्छेंं से साफ कीजिये और पालक के पत्तें गर्म पानी से धो लिजिये।
२) पालक, प्याज, हरी मिर्च, अदरक, छोटे छोटे टुकडों में काट लिजिये ताकि पालक की प्युरी अच्छेंं से फाइन पेस्ट बन जाए।
३) मिक्सी के जार में पालक, प्याज, हरी मिर्च, अदरक, लहसून, जीरा, नमक, हल्दी डाल दिजिये और अच्छी तरह से फाईन पेस्ट बना लिजिये। पेस्ट बनाते समय पानी की जरूरत नहीं पड़ती।

४) पेस्ट बनाने के बाद बाऊल में निकालिये और उसमें चणे का आटा डाल दिजिये।

५) पालक की पेस्ट में चणे का आटा अच्छेंं से मिला लिजिये।
६) पालक और चणे के आटे का बँटर बनानेंं के लिए जरूरत पड़ी तो थोडासा पानी मिलाकर स्मूथ बॅटर बना लिजिये।


७) पालक और आटे का स्मूथ बॅटर बनानें के बाद चम्मच से अच्छी तरह से फैंट लिजिये।
८) गँस पर तवा या पँन रखकर गरम कीजिये।
९) गरम किये हुए पँन पर एक चम्मच तेल डालिये और चारों ओर लगा दिजिये।
१०) पँन को तेल लगाने के बाद एक कटोरी में बॅटर लेकर डोसे जैसे फैला दिजिये।
११) पालक चिला (धिरडे) दोनों तरफ़ से सेकनें के बाद प्लेट में सर्व्ह कीजिये।
१२) पालक चिला कौनसी भी चटणी, सॉस या आचार के साथ परोसिये।
टिपः चणें के आटे के साथ दुसरे आटे मिलाकर भी बॅटर बना सकतें हैं। चणें के आटे में मकई का आटा, चणें के आटे में चावल का आटा मिला सकतें हैं।
         मेरे वर्धा के किचन में बहुत ही कम चीजें उपलब्ध होती है। इसिलिए कुछ चीजें इस में नहीं हैं लेकिन आप हिंग, हरा धनिया इस बॅटर में मिला सकते हैं।

गपशप

गपशप 


देश विदेश के सभी पाठक को मेरा सविनय प्रणाम।
भारत, युनायटेड स्टेटस्, युनायटेड किंगडम्, सिंगापूर, ऑस्ट्रेलिया, चीन, बहारीन और अननोन रिज़न के सभी पाठकों ने मेरे दोनों (मराठी और हिंदी) ब्लॉग पढ़कर मेरा हौसला बढ़ाया इसलिए सब को धन्यवाद देती हूँ।
           बहुत सारे पाठकों ने व्हॉट्सऍप पर कमेंट्स भेजें है और पूछा हैं की," हमनें ब्लॉग पर कमेंट्स भेजी लेकिन दिखायी नहीं दी।" इसलिए आप से निवेदन करती हूँ की, कमेंट्स लिखनें के बाद सामने दिखायी देनेवालें 'साईन आऊट' पर क्लिक ना करें। कमेंट्स के नीचे दिखायी देनेवालें 'पब्लिश' शब्द पर क्लिक करेंगे तब आप की कमेंट्स पब्लिश होगी और दिखायी देगी।
     आप सभी का प्यार मेरा लिखनें का हौसला बढ़ाता हैं इसिलिए मैं कोशिश करूँगी की आप को सुकून, शांंती और हेल्दी जिंदगी मिले। अपने आसपास तो अशांती और अविचार फैले हुए हैं। पूरी दुनिया ही तणाव में जी रहीं है इसिलिए अच्छा खानपान और अच्छे विचार आप तक पहुँचाने की कोशीश मैं हमेशा करूँगी।
        आज महाराष्ट्रा (भारत) में 'अक्षय्य त्त्रुतियाँ' का त्योहार मनाया जाता हैं। आज के दिन कि हुयी कामनाएँ हमेशा के लिए होती हैं और अक्षय्य रहती हैं।
       आज मैं कामना करती हूँ की आप सभी का जीवन स्वास्थ्यमय और शांती से भरा हुआ रहें। अक्षय्य तृतीया  की बहुत सारी शुभकामनाएँ।
      फिर से आप सभी को धन्यवाद देती हूँ।

Monday, 6 May 2019

पालक मसाला खिचडी

           पालक मसाला खिचडी
हम लोग नासिक से वर्धा आए और यहाँ घर में खाली दस बारह बर्तन में ही सबकुछ करना पड़ता हैं। वहाँ नासिक में बर्तनो से घर भरा हुआ हैं और यहाँ पे कुछ अलग ही माहौल हैं।
खाना बनवातें समय पहले बर्तनों को और घर में बची हुई सब्जीयों के बारे में सोचकर आज कौनसा व्यंजन बनवाना हैं, यह सोचना पड़ता हैं।


जो कुछ घर मे सामग्री थी उसी से पालक मसाला खिचडी बनायी। यहाँ वर्धा में आठ-दस दिन का आना जाना रहता हैं इसिलिए मैने इंडक्शन स्टोव्ह पर ही खाना बनाती हुँ।
                 उपर प्लेट में रखी हुयी सामग्री में तेल और नमक नहीं हैं।
तेल गरम होने के बाद प्लेट में रखी हुयी पालक और हरा धनिया छोड़कर सारी चीजें एक एक कर के तेल में डाल दी। सारी चीजें अच्छी तरह से भुननें के बाद चावल, मसूर की दाल डालकर गरम पानी डाला और दस मिनट पकनें दिया।
दस मिनट पकने के बाद पालक और हरा धनिया डाल दिया।
स्वादानुसार नमक डालकर प्रेशर कुकर का ढक्कन लगाकर धीमी आंच पर पाँच मिनट (कुकर की सिटी बज़े या न बज़े फिर भी गँस बंद करना मत भूलियें) रखा और इंडक्शन स्टोव्ह बंद कर दिया।
            एक प्लेट में खिचडी सर्व्ह की और दिलिप को खाना खानें के लिए आवाज़ दी तो सामने आयी हुयी प्लेट देखकर खूश हो गए और खाना बनाने की  मेरी मेहनत काम आ गई।
आज पालक मसाला खिचडी सामने सामग्री रखकर कैसे बनायी जाए। इस के बारे में लिखनें की कोशीश की हैं। अलग एक्सस्पिरीमेंट कर के रेसिपी लिखी हैं। आप भी आप के हिसाब से सामग्री लेकर पालक मसाला खिचडी बनाईये और उस के बारे में जरूर लिखकर बताईये।
धन्यवाद।
टिपः मसूर की दाल के बदले आप तुवर दाल, मुँग दाल ले सकते हैं। मैंनै घर में जो दाल थी उसी से काम चला लिया                          
धन्यवाद
©ज्योत्स्ना पाटील 

Sunday, 5 May 2019

गपशप

गपशप 

सभी पाठकों को मेरा सलाम।
अहिंदी भाषिक होनें की वजह से मेरे लेखन में कुछ गलतियाँ तो जरूर हैं लेकिन भाषा एक ऐसा माध्यम हैं, जो इन्सानों को जोड़ने का कार्य करता हैं। हर एक भाषा दुसरी भाषा के शब्द अपनाकर ही सम्रुद्ध होती हैं। जैसे मराठी भाषा में अरबी, फार्सी, पोर्तुगीज, अंग्रेजी, हिंदी, कन्नड, गुजराती भाषा के बहुत सारे शब्द समाविष्ठ हो गए। मेरे कहनें का मतलब हैं की, अपने विचार दुसरों तक पहुँचाना इसी जुनून से मैं ब्लॉग लिखकर खाना बनवानें के तरीकें और खानपान से जुड़ी बाते आप से शेअर करती रहुँगी।
     आप सभी ने मेरा ब्लॉग पढ़कर मेरा हौसला बढाया इसलिए शुक्रीया।
       मेरी गलतियाँ आप बेझिझक लिखकर बताईये। मेरी रेसिपी फॉलो की तो कैसे बनीं इस के बारे मेंं लिखकर बताईये।
धन्यवाद।

पालक खिचडी (हरीभरी खिचडी)

              पालक खिचडी (हरीभरी खिचडी)

सामग्रीः
पालक...................एक कटोरी
चावल....................एक कटोरी
तुवर दाल................आधी कटोरी
प्याज......................एक मध्यम आकार का
लहसून....................पाँच छह कलियाँ
तेज पत्ते....................दो
तेल .........................दो बड़े चम्मच
राई दाना...................एक छोटा चम्मच
जीरा.........................एक छोटा चम्मच
हींग...........................पाव चम्मच
मुँगफली के दानें...........पाव कटोरी
हरी मिर्च......................तीन
अदरक........................छोटासा टुकडा
कसा हुआ नारियल.........पाव कटोरी
कटा हुआ हरा धनिया.......पाव कटोरी
नमक.............................स्वादानुसार

विधीः
१) चावल को साफ़ कीजिये, धोइयेःः
२) तुवर दाल को साफ़ कीजिये, धोइये।
३) प्याज को छीलिये और लंबे आकार में काटिये।
४) अद्रक, लहसुन, हरी मिर्च की पेस्ट बना लिजिये।
५) एक बर्तन में तेल को गरम कीजिये, राई दाना और जीरा डालिये, हींग डालिये, तेज़पत्ता  डालिये और एक मिनट तक हिलाते हुये भूनिये। प्याज सुनहरे होने के बाद अदरक,लहसुन, मिर्च की पेस्ट डालिये और भूनिये। मुँगफली के दाने, हल्दी डालिये और चावल, दाल डालिये और अच्छी तरह से हिलाईये, पकाने के हिसाब से गर्म पानी डालिये और बर्तन पर ढक्कन रखकर धीमी आंच पर दस मिनट पकने दिजिये।
६) दस मिनट बाद ढक्कन निकालकर कटा हुआ पालक ,नमक डालिये, अच्छे से मिलाईये और फिर से ढक्कन रखकर पाँच मिनट पकाईये।
७) खिचडी पकने के बाद सर्हिंग बाऊल में निकालिये कसा हुआ नारियल और हरे धनिये से सजाकर गर्म परोसिये।
टिपः देसी घी डालकर खिचडी का स्वाद लिजिये।

©ज्योत्स्ना पाटील

Friday, 3 May 2019

सब्जीवाली खिचडी की सज़ा

         सब्जीवाली खिचडी की सज़ा
           पूरे भारत में खिचडी खानेवालों की कमी नहीं हैं। खिचडी का नाम लेते ही दाल चावल आँखो के सामने आ जाते हैं लेकीन बचपन में माँ के घर जो खिचडी बनती थी वो खिचडी मुझे पूरी सब्जी मंडी की याद दिला देती हैं। माँ के घर की खिचडी का सब्जी मंडी से नाता जुड़ने की वजह कुछ अलग ही हैं।
         मेरे पिताजी ब्राम्हणगांव (जि. नासिक,महाराष्ट्र) में रहते थे। वहाँ वे शिक्षक की नौकरी करते थे। मेरे पिताजी को गाँव के लोग कहते थे,"सरजी,हमारे बच्चों की ट्यूशन लिजिये।" मेरे पिताजी को 'ट्यूशन' के नाम से ही नफ़रत थी।
मेरे पिताजी गाँव के लोगों को कहतें थे, "मैं जो विषय बच्चों को पढ़ाता हुँ, उस विषय की ट्यूशन लगाने की कोई जरूरत नहीं।" पिताजी की बात सुनकर गाँव के लोग कहतें थे, "आप के विषय बच्चों को पढ़ानें की जरूरत नहीं हैं, यह हम जानते हैं। बच्चों को दुसरें विषय तो आप पढ़ा सकते हैं।" गाँववाले जिद पर उतर गये तब पिताजी ने कहा, "मैं ट्यूशन लेने के लिए तैय्यार हुँ लेकीन मेरी ट्यूशन का फिक्स समय नहीं रहेगा और मैं ट्यूशन के पैसे नहीं लुँगा।
         पिताजी की शर्ते मानकर गाँववाले बच्चों को हमारे यहाँ ट्यूशन के लिए भेजने लगे और सारी सब्जी मंडी हमारे घर आ के बैठ गयी। गाँववाले भी बहुत होशियार थे। सर, ट्यूशन की फीस नहीं लेते हैं तो वे अपने खेती में जो अनाज़ उपजता था, वो अनाज, सब्जीयाँ ,फल, दूध घर भेज देते थे।
         कभी कभी एक ही सब्जी चार पाँच बच्चे ले आते तब वो सब्जी गली में दुसरे घरों में बाँटकर ही बहुत सारी बचती थी तब मेरी माँ एक बार सब्जी बनाती और बची हुयी सब्जी सिधे खिचडी मे डाल देती थी। इसलिए हमारे यहाँ गोबी खिचडी, पालक खिचडी, मटार खिचडी, बीन्स की खिचडी, दुधी की खिचडी, सिमला मिरची की खिचडी, टमाटर खिचडी, फुलवर की खिचडी ऐसी बहुत सारी सब्जीयाँ खिचडी में दाल चावल के साथ झिम्मा खेलती थी। हम माँ को कहतें थे, "अच्छा हैं, सब्जी के कारण अपने दाल चावल तो बच जाते हैं।" सभी हँसनें लगते। 'ज्ञान बाँटनें के लिए होता हैं, पैसा कमानें के लिए नहीं'  पिताजी की यही सोच की शिक्षा हम सब को सब्जीवाली खिचडी खाकर मिलती थी पर हमें पिताजी की सोच पर गर्व था , हैं और रहेगा। आज की बाजारू शिक्षा प्रणाली को देखकर हम मेरे पिताजी को शत शत प्रणाम करते हैं।
     खिचडी से जुड़ी बहुत सारी बातें है। आज के लिए इतना ही।

©ज्योत्स्ना पाटील 

Thursday, 2 May 2019

pickle

                                                                 आचार 
                       गर्मी के दिन हैं और खानें में आचार ना हो तो खाना खानें में मज़ा नही आता। आज इसी बहाने आचार बनाने की विधी जाननें की कोशीश करते हैं।
          एक दिन मेरी सहेली सुनिता कुलकर्णी मेरे घर आयी थी तब मेज़ पर रखी हुई आम के आचार की बरनी को देखकर बोली, " अरे वा! नया आचार।" उसके मुँह से 'नया आचार' सुनकर मैं हँसकर बोली, आचार भी नया, पुराना होता हैं क्या?" मेरी हँसी को नज़रअंदाज कर के सुनिता रौब ज़माते हुए बोली,"तू बाद में हँसती रह, पहले मुझे आचार चखने दे, मेरे मुँह मे पानी आ रहा हैं। झट से एक प्लेट और चम्मच दे, मुझे आचार चखना हैं।" सुनिता ने रोटी के साथ आम का आचार खाया और बोली, "मुझे कुछ मत कहना, इस साल मुझे तेरे  ही हाथ से आचार बनवाना हैं। तुम जब भी नासिक में रहेगी तब मुझे बता देना। मैं सारी सामग्री लाकर रखुँगी।"
         आज की 'आम के आचार' की रेसिपी आप के साथ शेअर करनें का मौका सुनिता की जिद की वज़ह से मिला इसलिए आज की रेसिपी मैं सुनिता को डेडिकेट करती हुँ।
        
  आम का आचार
सामग्रीः  दो कच्चे आम, एक कटोरी दरदरा पिसी हुई लाल मिर्च पाउडर, आधी कटोरी सरसों (राई) की दाल, एक टी स्पून मेथी दाना, तीन टेबल स्पून सौंफ, चार पाँच लौंग, चार पाँच काली मिर्च, छोटासा टुकडा दालचिनी का, एक टी स्पून हिंग पाउडर, एक टेबल स्पून हल्दी पाउडर, तीन टेबल स्पून धनिया पाउडर, पाव कटोरी नमक, पाव कटोरी शक्कर, डेढ कटोरी तेल
बनाने की विधीः  मेथी दाना, सौंफ, दालचिनी एकसाथ पिस लिजिये। मेथी दाना,सौंफ, दालचिनी पिसने के बाद उसमे सरसों की दाल डालकर फिरसे थोडासा पिस लिजिये।
                   तेल गर्म कर के उसमे लौंंग, काली मिर्च डाल दिजिये। लौंग, काली मिर्च गर्म तेल में डालने के बाद तेल के उपर आ गयी तो समझ लेना तेल अच्छी तरह से गर्म हुआ हैं। गर्म किया हुआ तेल ठंडा होने दिजिये।
         लाल मिर्च पाउडर, धना पाउडर, हल्दी पावडर, हिंग पाउडर, पिसी हुयी (सरसो, मेथी दाना,सौंफ,दालचिनी) पाउडर, नमक, शक्कर अच्छी तरह से मिला लिजिये और गर्म किया हुआ तेल ठंडा होने के बाद डालकर सब मसाला अच्छी तरह से मिला लिजिये।
                    आम अच्छी तरह से साफ कर के छोटे छोटे टुकडों में काट लिजिये। आम के टुकडे तैय्यार किये मसाले में मिला दिजिये। बडे चम्मच से अच्छी तरह से उपर नीचे कर के मिक्स कर लिजिये।
टिपः लौंग, काली मिर्च, दालचिनी घर में नही हैं तो कोई बात नहीं। इन चिजों के बिना ही आचार बना सकतें हो।


©ज्योत्स्ना पाटील         
               

Wednesday, 1 May 2019

पोहा और बच्चों की संवेदना

सभी पाठ़कोंं को मेरा प्रणाम।
          पोहा और बच्चों की संवेदना
महाराष्ट्रा में सभी जगह पर सुबह के नाश्ते में उपमा, मिसल और पोहा खाया जाता हैं वैसे तो इडली, डोसा, वडा सांभार, सँडविच, छोले भटुरे भी खाते हैं लेकीन ज्यादा तर पोहा, उपमा खाते हैं।
मेरे पती और बच्चे जिस दिन आराम से नाश्ता करते हैं उस दिन मैं नाश्ते की प्लेट सजाकर देती हूँ। दो दिन की छुट्टी थी तो बच्चे घर आए थे सुबह आराम से उठे ब्रश करके सीधे चाय पिने बैठे और बातें करने बैठ गयें। मैने देखा तो अब ये तीनो दो घंटे तक उठनें का नाम नहीं लेंगे मेरे मन ने कहाँ 'चल ज्योत्स्ना, तू चल तेरे  काम पर इनके साथ बैठकर कुछ नहीं होगा क्योंकी ए चिल्लाचिल्लाकर बातें करके थक जायेंगे और बाद में तुझंपर ही चिल्लायेंगे,' "मम्मी भूक लगी, जल्दी नाश्ता दो।" तीनो का बातें करने का मूड देखकर मैं सीधे नाश्ता बनाने के लिए रसोई में गयी। आज नाश्ता आराम से देना था इसलिए मैने पोहा बनाकर प्लेट सजायी।
दिलिप को और बेटा, बेटी तीनो के हाथ में नाश्ते की प्लेट थमा दी। प्लेट की तरफ देखकर मेरा बेटा स्वप्नील बोला, "मम्मी, प्लेट को देखकर खाने का दिल कर रहा हैं लेकीन सजाये हुए पोहा को तोडने का दिल नहीं करता। बेटे की बात सुनकर बहुत अच्छा लगा क्योंकी बेजान चिजों को तोडने का दिल नहीं होता तब मेरा बेटा दुसरे के दिल को तोडने के बारे में सौ बार सोचेगा। किसी के आँगन में रंगोली हो और उस रंगोली पर किसी ने पैर रखकर रंगोली बिघाड दी तो मेरे बेटे और बेटी को बहुत ही बुरा लागता हैं, तब दोनों के मुँह से एक ही बात निकलती हैं, "कौन बेवकूफ था। उसे रंगोली दिखायी नहीं दी क्या!" बच्चे संवेदनशील होना यहीं धनदौलत हैं। 

©ज्योत्स्ना पाटील                

गाजर टमाटर उत्तप्पा

 आज की रेसिपी - गाजर टमाटर उत्तप्पा सभी फूड़ी दोस्तों को नमस्ते। आज की रेसिपी सभी को जरूर पसंद आएगी क्योंकी हम दोसा, उत्तप्पा तो हमेशा खाते ह...