आचार
गर्मी के दिन हैं और खानें में आचार ना हो तो खाना खानें में मज़ा नही आता। आज इसी बहाने आचार बनाने की विधी जाननें की कोशीश करते हैं।
एक दिन मेरी सहेली सुनिता कुलकर्णी मेरे घर आयी थी तब मेज़ पर रखी हुई आम के आचार की बरनी को देखकर बोली, " अरे वा! नया आचार।" उसके मुँह से 'नया आचार' सुनकर मैं हँसकर बोली, आचार भी नया, पुराना होता हैं क्या?" मेरी हँसी को नज़रअंदाज कर के सुनिता रौब ज़माते हुए बोली,"तू बाद में हँसती रह, पहले मुझे आचार चखने दे, मेरे मुँह मे पानी आ रहा हैं। झट से एक प्लेट और चम्मच दे, मुझे आचार चखना हैं।" सुनिता ने रोटी के साथ आम का आचार खाया और बोली, "मुझे कुछ मत कहना, इस साल मुझे तेरे ही हाथ से आचार बनवाना हैं। तुम जब भी नासिक में रहेगी तब मुझे बता देना। मैं सारी सामग्री लाकर रखुँगी।"
आज की 'आम के आचार' की रेसिपी आप के साथ शेअर करनें का मौका सुनिता की जिद की वज़ह से मिला इसलिए आज की रेसिपी मैं सुनिता को डेडिकेट करती हुँ।
आम का आचार
सामग्रीः दो कच्चे आम, एक कटोरी दरदरा पिसी हुई लाल मिर्च पाउडर, आधी कटोरी सरसों (राई) की दाल, एक टी स्पून मेथी दाना, तीन टेबल स्पून सौंफ, चार पाँच लौंग, चार पाँच काली मिर्च, छोटासा टुकडा दालचिनी का, एक टी स्पून हिंग पाउडर, एक टेबल स्पून हल्दी पाउडर, तीन टेबल स्पून धनिया पाउडर, पाव कटोरी नमक, पाव कटोरी शक्कर, डेढ कटोरी तेल
बनाने की विधीः मेथी दाना, सौंफ, दालचिनी एकसाथ पिस लिजिये। मेथी दाना,सौंफ, दालचिनी पिसने के बाद उसमे सरसों की दाल डालकर फिरसे थोडासा पिस लिजिये।
तेल गर्म कर के उसमे लौंंग, काली मिर्च डाल दिजिये। लौंग, काली मिर्च गर्म तेल में डालने के बाद तेल के उपर आ गयी तो समझ लेना तेल अच्छी तरह से गर्म हुआ हैं। गर्म किया हुआ तेल ठंडा होने दिजिये।
लाल मिर्च पाउडर, धना पाउडर, हल्दी पावडर, हिंग पाउडर, पिसी हुयी (सरसो, मेथी दाना,सौंफ,दालचिनी) पाउडर, नमक, शक्कर अच्छी तरह से मिला लिजिये और गर्म किया हुआ तेल ठंडा होने के बाद डालकर सब मसाला अच्छी तरह से मिला लिजिये।
आम अच्छी तरह से साफ कर के छोटे छोटे टुकडों में काट लिजिये। आम के टुकडे तैय्यार किये मसाले में मिला दिजिये। बडे चम्मच से अच्छी तरह से उपर नीचे कर के मिक्स कर लिजिये।
टिपः लौंग, काली मिर्च, दालचिनी घर में नही हैं तो कोई बात नहीं। इन चिजों के बिना ही आचार बना सकतें हो।
टिपः लौंग, काली मिर्च, दालचिनी घर में नही हैं तो कोई बात नहीं। इन चिजों के बिना ही आचार बना सकतें हो।
©ज्योत्स्ना पाटील

