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Sunday, 26 May 2019

धर्मेश की रेसिपी

          धर्मेश की रेसिपी
     
        आज की रेसिपी मैं धर्मेश को डेडिकेट करती हूँ। पंद्रह सोलह साल पहले की बात हैं। तब मैं दिवाली की और गर्मी की छुट्टीयों मे बच्चों को लेकर गोवा जाती थी। गोवा के साखलीम गाँव में हम रहते थे और हमारी कंपनी साखलीम से बारह कि. मी. पर पिसुर्लेयम के पास थी। हम सब दोपहर का खाना कंपनी में ही करते थे। कंपनी में खाना बनाने का काम बिहार से आया हुआ कूक धर्मेश करता था। धर्मेशने बनाई हुयी सब्जी हम सब बड़े चाव से खाते थे। आज भी बच्चों को गोवा की याद आते ही मुझे कहतें है, " मम्मी, बिहारी बाबू की सब्जी बनाओ।"
       चलिए, बनाकर देखते है, बिहारी बाबू की रेसिपी।
रेसिपी के लिए प्लेट में रखी हुयी सब्जीयाँ लिजिये।
धर्मेश की रेसिपी के लिए सामग्री चाहिए ,
तीन या चार प्याज़, दो आलू, दो टमाटर, पत्ता गोभी, एक टिंडा, एक हरी मिर्च, एक टेबल स्पून गरम मसाला, एक टेबल स्पून लाल मिर्च पाउडर, चुटकीभर हल्दी, एक टी स्पून राई, एक टी स्पून जीरा, आधा टी स्पून हिंग पाउडर, नमक स्वादानुसार, दो टेबल स्पून तेल      
१) प्याज के छिलके निकालिये।
२) आलू, टमाटर, टिंडा(ढेमसे), बंदगोबी को पानी से धोईये।
३) प्रेशर कुकर में प्याज, आलू, टमाटर, टिंडा, बंदगोबी, हरी मिर्च, हल्दी, नमक,एक टेबल स्पून तेल, आधी कटोरी पानी डालिये और दो सिटीयाँ होने तक गँस पर रखिये।
४) दो सिटीयाँ होने के बाद गँस बंद कीजिये और कुकर को ठंडा होने दिजिये।
५) प्रेशर कुकर में से सब्जीयाँ प्लेट में निकालिये।
६) टमाटर के छिलके निकालिये।
७) प्याज, आलू, बड़े टुकडों में काट लिजिये।
८) टिंडा के टुकडें कीजिये और बीज निकालिये।
९) बंदगोबी के ही बड़े बड़े टुकडे कर लिजिये।
१०) गँस पर कड़ाही रखिये और गर्म होने दिजिये।
११) कड़ाही गर्म होने पर दो बड़े चम्मच तेल डालिये।
१२) तेल गर्म होने पर राई, जिरा, हिंग पाउडर, अदरक लहसन का पेस्ट डालिये, पकाये हुए प्याज के और टमाटर के टुकडे डालिये, दो मिनट तक भूनिये।

१३) प्याज, टमाटर भूनने के बाद गरम मसाला, लाल मिर्च पाउडर, धना पाउडर अपने स्वादानुसार डालिये।
१४) सारे मसाले अच्छे से भूनने के बाद आलू, बंदगोबी, टिंडा डालिये और कुकर में बचा हुआ दो चम्मच पानी डाल दिजिये।
१५) सब्जी पकाते समय नमक डाला था इसलिए जरूरत होगी तो नमक डालना।
१६) हरा धनिया डालिये और गरमागरम सर्व्ह कीजिये।
     धर्मेश की रेसिपी धर्मेश की याद दिलाती हैं।उसके हाथ से बनायी हुयी सब्जी की टेस्ट कुछ अलग ही थी। आज भी वो स्वाद हम भूले नहीं।
टिपः धर्मेश की सब्जी में टिंडा नहीं था, मैने बचा हुआ एक टिंडा धर्मेश की सब्जी में डाल दिया।

©ज्योत्स्ना पाटील

Saturday, 18 May 2019

मीठा चीला (गोड धिरडे) रेसिपी

               मीठा चीला (गोड धिरडे)
           गर्मी के दिन, बच्चों की छुट्टीयाँ चल रहीं हैं तो घर में उछलकूद करनेवाले बच्चों को रोज़ नाश्ते के लिए अलग सा और पौष्टिक नाश्ता बनाना हर माँ के लिए सोचना पडता हैं। चलिये आज सोचने के बजाए तुरंत नाश्ता बनाने में जुट जाईये।
         मीठा चीला बनाने के लिए बहुत ही कम घरेलू चीजे से बनता हैं।
मीठा चीला बनाने के लिए सामग्री चाहिए,
सामग्रीः                                                                                                         
एक कटोरी गूड, एक कटोरी गेहुँ का आटा, एक टेबल स्पून तील, नमक,तेल।
विधीः
१) गूड में पानी डालिये और पिघलने दिजिये।
२) गूड पिघलने के बाद छानिये।
३) गूड के पानी (घोल) में गेहुँ का आटा मिलाईये और बँटर बना लिजिये।
४) बँटर में चुटकीभर नमक डालिये।
५) बँटर में तील मिलाईये।
६) गँस पर पँन गर्म कीजिये।
७) गर्म पँन पर एक चम्मच तेल चारों तरफ फैला दिजिये।
८) आधी कटोरी बँटर कटोरी की सहायता से डोसे के जैसा फैला दिजिये।
९) दो मिनट बाद पलटा दिजिये।
१०) दोनों तरफ से सुनहरा होनें पर गरमागरम परोसिये।
११) दही, घी, आचार और तील की चटणी के साथ मीठा चीला परोसिये।
टिपः मीठा चीला के ऊपर चॉकलेट कद्दूकस कर के बच्चों को परोसिये।
          मीठा चीला बच्चों को जरूर पसंद आएगा और बडे चाव से खाएँगे।

©ज्योत्स्ना पाटील 

Thursday, 16 May 2019

ब्रेड पकौडा

ब्रेड पकौडा


आज शाम का चटपटा, दो मिनट में बननेवाला स्नँक्स।
चार दिनों से घूम फिरकर फिर अपने नासिक के घर पहुँच गये। आज के स्नँक्स की तैयारी कर लेते हैं। आप भी देख लिजिये यह सामग्री घर में है या नहीं।
चणे के आटे में डाली हुयी सभी चीजें घरेलू हैं। चलिये मिलते हैं शाम को तैयार रहिये स्नँक्स खानें के लिए।
                  ब्रेड पकौडा
बच्चे जब स्कूल से या खेलकर घर आते हैं तो कहतें हैं,"मम्मी, जोर की भूख लगी हैं। मुझे खानें को दो।" बच्चों को झटपट स्नँक्स बनाकर खिलाते हैं।
ब्रेड पकौडा के लिए सामग्री चाहिये,
सामग्रीः चार ब्रेड की स्लाईस, एक कटोरी चणे का आटा, एक टेबल स्पून लाल मिर्च पाउडर, आधा टी स्पून हल्दी, आधा टी स्पून हिंग पाउडर, एक टी स्पून अजवाईन, चुटकीभर बेकींग सोडा (खाने का सोडा), नमक स्वादानुसार, तलने के लिए तेल।
विधीः
१) ब्रेड की स्लाईस को चार भागों में तिकोनाकार में काट लिजिये।
२) चणे के आटे में पानी डालकर बँटर बना लिजिये।
३) बँटर में लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, नमक, अजवाईन मिलाकर फेट लिजिये।
४) बटर में बेकींग सोडा मिलाईये।
५) गँस पर कडाही रखकर गर्म कीजिये।
६) गर्म कडाही में तलने के लिए तेल डालिये और गर्म होने दिजिये।
७) तेल गर्म कीजिये। बँटर (घोल) में ब्रेड की स्लाईस डुबो कर गर्म तेल में हल्के सुनहरे होने तक तलिये।
८) नारियल की चटणी, इमली की चटणी, सॉस या दही के साथ गर्म परोसिये।
         
            
बच्चों को तली हुयी चीजे खाना अच्छा लगता हैं लेकिन बड़े या हेल्थ कॉन्शस लोग तली हुयी चीजे खाने से परहेज करते हैं तब आप बेसन का घोल थोडा सा गाढ़ा बनाईये और ब्रेड की स्लाईस के उपर बँटर (बेसन का गाढ़ा घोल) फैला दिजिये और पँन गर्म कर के एक चम्मच तेल डालिये। पँन में स्लाईस रखकर दोनों तरफ से शँलो फ्राय कर लिजिये और मनपसंद चटणी, सॉस के साथ परोसिये।

©ज्योत्स्ना पाटील



Monday, 6 May 2019

पालक मसाला खिचडी

           पालक मसाला खिचडी
हम लोग नासिक से वर्धा आए और यहाँ घर में खाली दस बारह बर्तन में ही सबकुछ करना पड़ता हैं। वहाँ नासिक में बर्तनो से घर भरा हुआ हैं और यहाँ पे कुछ अलग ही माहौल हैं।
खाना बनवातें समय पहले बर्तनों को और घर में बची हुई सब्जीयों के बारे में सोचकर आज कौनसा व्यंजन बनवाना हैं, यह सोचना पड़ता हैं।


जो कुछ घर मे सामग्री थी उसी से पालक मसाला खिचडी बनायी। यहाँ वर्धा में आठ-दस दिन का आना जाना रहता हैं इसिलिए मैने इंडक्शन स्टोव्ह पर ही खाना बनाती हुँ।
                 उपर प्लेट में रखी हुयी सामग्री में तेल और नमक नहीं हैं।
तेल गरम होने के बाद प्लेट में रखी हुयी पालक और हरा धनिया छोड़कर सारी चीजें एक एक कर के तेल में डाल दी। सारी चीजें अच्छी तरह से भुननें के बाद चावल, मसूर की दाल डालकर गरम पानी डाला और दस मिनट पकनें दिया।
दस मिनट पकने के बाद पालक और हरा धनिया डाल दिया।
स्वादानुसार नमक डालकर प्रेशर कुकर का ढक्कन लगाकर धीमी आंच पर पाँच मिनट (कुकर की सिटी बज़े या न बज़े फिर भी गँस बंद करना मत भूलियें) रखा और इंडक्शन स्टोव्ह बंद कर दिया।
            एक प्लेट में खिचडी सर्व्ह की और दिलिप को खाना खानें के लिए आवाज़ दी तो सामने आयी हुयी प्लेट देखकर खूश हो गए और खाना बनाने की  मेरी मेहनत काम आ गई।
आज पालक मसाला खिचडी सामने सामग्री रखकर कैसे बनायी जाए। इस के बारे में लिखनें की कोशीश की हैं। अलग एक्सस्पिरीमेंट कर के रेसिपी लिखी हैं। आप भी आप के हिसाब से सामग्री लेकर पालक मसाला खिचडी बनाईये और उस के बारे में जरूर लिखकर बताईये।
धन्यवाद।
टिपः मसूर की दाल के बदले आप तुवर दाल, मुँग दाल ले सकते हैं। मैंनै घर में जो दाल थी उसी से काम चला लिया                          
धन्यवाद
©ज्योत्स्ना पाटील 

Thursday, 2 May 2019

pickle

                                                                 आचार 
                       गर्मी के दिन हैं और खानें में आचार ना हो तो खाना खानें में मज़ा नही आता। आज इसी बहाने आचार बनाने की विधी जाननें की कोशीश करते हैं।
          एक दिन मेरी सहेली सुनिता कुलकर्णी मेरे घर आयी थी तब मेज़ पर रखी हुई आम के आचार की बरनी को देखकर बोली, " अरे वा! नया आचार।" उसके मुँह से 'नया आचार' सुनकर मैं हँसकर बोली, आचार भी नया, पुराना होता हैं क्या?" मेरी हँसी को नज़रअंदाज कर के सुनिता रौब ज़माते हुए बोली,"तू बाद में हँसती रह, पहले मुझे आचार चखने दे, मेरे मुँह मे पानी आ रहा हैं। झट से एक प्लेट और चम्मच दे, मुझे आचार चखना हैं।" सुनिता ने रोटी के साथ आम का आचार खाया और बोली, "मुझे कुछ मत कहना, इस साल मुझे तेरे  ही हाथ से आचार बनवाना हैं। तुम जब भी नासिक में रहेगी तब मुझे बता देना। मैं सारी सामग्री लाकर रखुँगी।"
         आज की 'आम के आचार' की रेसिपी आप के साथ शेअर करनें का मौका सुनिता की जिद की वज़ह से मिला इसलिए आज की रेसिपी मैं सुनिता को डेडिकेट करती हुँ।
        
  आम का आचार
सामग्रीः  दो कच्चे आम, एक कटोरी दरदरा पिसी हुई लाल मिर्च पाउडर, आधी कटोरी सरसों (राई) की दाल, एक टी स्पून मेथी दाना, तीन टेबल स्पून सौंफ, चार पाँच लौंग, चार पाँच काली मिर्च, छोटासा टुकडा दालचिनी का, एक टी स्पून हिंग पाउडर, एक टेबल स्पून हल्दी पाउडर, तीन टेबल स्पून धनिया पाउडर, पाव कटोरी नमक, पाव कटोरी शक्कर, डेढ कटोरी तेल
बनाने की विधीः  मेथी दाना, सौंफ, दालचिनी एकसाथ पिस लिजिये। मेथी दाना,सौंफ, दालचिनी पिसने के बाद उसमे सरसों की दाल डालकर फिरसे थोडासा पिस लिजिये।
                   तेल गर्म कर के उसमे लौंंग, काली मिर्च डाल दिजिये। लौंग, काली मिर्च गर्म तेल में डालने के बाद तेल के उपर आ गयी तो समझ लेना तेल अच्छी तरह से गर्म हुआ हैं। गर्म किया हुआ तेल ठंडा होने दिजिये।
         लाल मिर्च पाउडर, धना पाउडर, हल्दी पावडर, हिंग पाउडर, पिसी हुयी (सरसो, मेथी दाना,सौंफ,दालचिनी) पाउडर, नमक, शक्कर अच्छी तरह से मिला लिजिये और गर्म किया हुआ तेल ठंडा होने के बाद डालकर सब मसाला अच्छी तरह से मिला लिजिये।
                    आम अच्छी तरह से साफ कर के छोटे छोटे टुकडों में काट लिजिये। आम के टुकडे तैय्यार किये मसाले में मिला दिजिये। बडे चम्मच से अच्छी तरह से उपर नीचे कर के मिक्स कर लिजिये।
टिपः लौंग, काली मिर्च, दालचिनी घर में नही हैं तो कोई बात नहीं। इन चिजों के बिना ही आचार बना सकतें हो।


©ज्योत्स्ना पाटील         
               

Monday, 29 April 2019

puranapoli (sweet paratha)

 सभी खानें के शौकीन लोगों को ज्योत्स्ना का प्यार भरा नमस्तें।
आज मैं आपको महाराष्ट्रीयन पुरणपोली (sweet paratha) कैसे बनातें हैं, इसके बारे में बताना चाहती हूँ।

सामग्री : एक कटोरी चणे की दाल, एक कटोरी शक्कर, एक टी स्पून इलायची पावडर, आधी कटोरी गेहू का आटा, आधी कटोरी मैदा, एक टी स्पून नमक, एक टी स्पून हल्दी, दो बडे चम्मच तेल, आधी कटोरी शुद्ध घी।

बनाने की विधी : आटा और मैदा छननी से छानिये नमक, हल्दी  और तेल मिलाकर उसमे पानी डालकर गुंथिये गीले कपडे से ढक्कर दो घंटे तक रखिये।
प्रेशर कुकर में दो कटोरी पानी डालकर उसमे चना दाल डाल दिजिये। उबाल आने तक उबलने दिजिये बाद में उपर का सफेद तवंग चम्मच से निकाल लिजिये। बाद में प्रेशर कुकर का ढक्कन लगाकर छह शिटीयां बजनें तक गॅसपर रहनें दिजिये। छह सिटियां होने के बाद गॅस बंद कर  दिजिये। ठंडा होने के बाद प्रेशर कुकर खोलकर पकी हुयी चनादाल में से पानी निकाल लिजिये (कढाई में छननी रखकर उसमे कुकर में पकायी हुयी दाल डालकर दाल और पानी अलग अलग कर लेना चाहिये दाल के पानी से मसालेदार करी बना सकते हैं)। पकी हुयी चनादाल में शक्कर डालकर ग्राईंडर में पीस लिजिये। बाद में इलायची पावडर मिला दिजिये इसे 'पुरण' कहा जाता हैं।
गुंथे हुये आटे को आठ बराबर भागो में बांटिये और प्रत्येक भाग के गोले बनाईये उसी तरह पुरण के ही बराबर आठ गोले बनाईये  अब प्रत्येक आटे के गोले को मध्यम आकार की चपाती में बेलिये। उसी चपाती में पुरण का गोला रखकर मोदक जैसा आकार दिजिये  और दोनों हाथोंसे दबाकर फिर से बेलिये और पराठे जैसा आकार दिजिये  और गर्म तवे पर थोडासा घी लगाकर पुरणपोली सुनहरा होने तक सेकिये।
 टिप : पुरणपोली घी के साथ खा सकते हैं। खीर, आम का ज्युस, दूध, दही इसके साथ खाने का आनंद लुटा सकते हैं।
            


पुरनपोली और उससे जुड़ी कुछ यादें
        मैं जब भी पुरनपोली बनाती हुँ तब कुछ यादें ताज़ा हो जाती हैं। आठ दस साल पहले की बात हैंं। मेरी देवरानी आयी थी साथ में मेरे भतीज़े ही थे। मेरे भतीज़े को खाने में मीठा बहुत पसंद था इसिलिए मैने पुरनपोली बनाने के लिए आटा गुंधा और दाल पकाकर पुरन तैयार कर के पुरनपोली बेली और तवेपर सेकनें लगी। तवेपर पुरी तरह से फुली हुयी पुरनपोली को देखकर मेरी देवरानी बोली, "दीदी, आपकी पुरनपोली तो पूरी तरह से फुली हुयी हैं, कितनी सॉफ्ट बनी हैं पुरनपोली।" हम सभी ने बड़े चाव से पुरनपोली का आस्वाद लिया। 
        एक बार मेरी सबसे बड़ी जेठानी मेरे घर आयी तब मैंने उनके लिए पुरनपोली और पुरनपोली के साथ खानें के लिये बासुँदी (रबड़ी) बनायी तो वह बोली, "ज्योत्स्ना, मैं दूध के व्यंजन सेवन नहीं करती। मैंने बासुँदी कभी चखकर ही नहीं देखी तो मैं घी के साथ पुरनपोली खा लुँगी।" जेठानीजी की बात सुनकर मुझे बहुत ही अचरज हुआ, बासुँदी पीना या खाना तो सभी को अच्छा लगता हैं। मैंने पहली बार सुना की, बासुँदी खानें से परहेज करनेवाले को। मैंने बड़े प्यार से जेठानीजी को समझाया की, "दीदी, आप मेरी खातीर बासुँदी और पुरनपोली खा के देखिये। आप को कुछ तकलीफ हुयी तो मैं तुरंत आप को दवा दे दुँगी, आप खा के देखिये कुछ नहीं होगा आप को।" 
      मेरी बात सुनकर मेरी जेठानीजी पुरनपोली बासुँदी के साथ खानें बैठ़ी और पहला नेवाला खानें के बाद बोली, "ज्योत्स्ना, सच में बासुँदी तो बहुतही स्वादिष्ट लगती हैं।" जेठानीजी की तारीफ सुनकर अच्छा लगा और मेरा प्रयास बेकार नहीं हुआ। 
             तिसरा किस्सा मेरी सहेली संगीता का है। मेरी सहेली की बेटी मेरे घर किसी काम के बहानें घर पर आयी थी। वह जब मेरे घर आयी तब मैं पुरनपोली बना रहीं थी। मैंने सहेली की बेटी को कहा, "स्रुष्टी, मम्मी को पुरनपोली पसंद हैं तो पुरनपोली ले के जा।" मैंने पुरनपोली का पार्सल उसके हाथ में थमा दिया। स्रुष्टी घर गयी और मम्मी को बोली, "मम्मी, मौसीनें मेरे लिये पुरनपोली दी हैं।" इतनें में संगीता बेटी को बोली, "मौसीनें, तेरे लिए नहीं मेरे लिए पुरनपोली भेज़ी हैं।" संगीता और स्रुष्टी ने पुरनपोली खानें के बाद तुरंत मुझे फोन किया और बोली, "ज्योत्स्ना, आजतक मैं समझती थी, मेरी पुरनपोली बहुतही सॉफ्ट होती हैं लेकीन तेरे हाथ की बनायी हुयी पुरनपोली खानें के बाद मेरा भ्रम टूट गया। सच में तेरे हाथ की पुरनपोली मुँह में डालतें ही घुल जाती हैं। शुक्रीया पुरनपोली खिलानें के लिये।


       सच में पुरनपोली से जुड़ी बहुत सारी यादें हैं। पुरनपोली बनाना और खिलाना मुझे अच्छा लगता हैं।
        आप भी पुरनपोली बनाइयें और दुसरों को खिलाइये।


©ज्योत्स्ना पाटील 

गाजर टमाटर उत्तप्पा

 आज की रेसिपी - गाजर टमाटर उत्तप्पा सभी फूड़ी दोस्तों को नमस्ते। आज की रेसिपी सभी को जरूर पसंद आएगी क्योंकी हम दोसा, उत्तप्पा तो हमेशा खाते ह...