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Sunday, 19 May 2019

गपशप

         गपशप

आज रेसिपी के बदले सिर्फ बातें।
 मेरा ब्लॉग पढ़ने वाले सभी पाठकों को मेरा सादर प्रणाम।
आप सभी ने मेरा हौसला बढ़ाया इसलिए दिल से शुक्रीया।
आज फास्ट फूड के ज़माने में सात्विक और स्वाद भरा खाना पिछे छूटता जा रहा था। लेकिन सात्विक भोजन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं, यह सोचकर फिर से सात्विक भोजन की विशेषता जानकर और सब को सात्त्विक भोजन के बारे में सजग करने के लिए मैने ब्लॉग लिखना शुरू किया और आप सभी ने फोन पे, व्हाट्सएप पे मेसेज के द्वारा मेरा हौसला बढाया इसलिए ब्लॉग पर रेसिपी आप से शेअर करने में मजा आ रहा हैं।
       रेसिपी से जुडी यादें मैं आप से शेअर करती रहुँगी। आप के भी कुछ अनुभव हो तो आप मुझसे जरूर शेअर किजिए।
       मैंने बताए हुए तरीकें से बनाया हुआ व्यंजन सही हुआ या बिघड गया तो बेझिझक कमेंट्स बॉक्स में या मेरे मेल पर मेल कर के लिखकर बता सकते हैं। मैं आप के सवाल का विस्तार से जवाब देने की कोशीश करूँगी। आप को कुछ खास रेसिपी के बारे में जानकारी चाहिए तो लिखकर बताईये। मैं मेरी तरफ से पूरी कोशीश करूँगी की आप को सही जानकारी देने की।
         आज फिर यात्रा कर रही हुँ इसलिए रेसिपी कल बनाकर खिलाऊँगी। आज आप से खाली गपशप करने का मन हुआ।
         चलिये, कल मिलते हैं स्वादभरी डिश के साथ। धन्यवाद।

Wednesday, 8 May 2019

आज सिर्फ सुनहरी यादें

         आज सिर्फ सुनहरी यादें
 
आज गुलजारजी का एक शेर याद आ रहा हैं। गुलजारजी कहतें हैं,
मिलता तो बहुत कुछ हैं इस जिंदगी में.......
बस हम गिनती उसी की करते हैं, जो हासिल ना हो सका।
      गुलजारजी की बातों पर गौर करते हुए आज हम सिर्फ अच्छी बातों को याद करेंगे और आज का दिन बेहतर बनाएँगें।
      अच्छी बातें बहुत सी हैं लेकिन हम खानपान से जुड़ी यादों का ही ज़िक्र करेंगे।
आज मैं आप से 'पालक चीला' से जुड़ी हुई यादें शेअर करूँगी।
         बीस साल पहले की बात हैं। मेरे पती दिलिपजी गोवा में रहते थे और मैं बच्चों के साथ नासिक में रहती थी। एक दिन अखबार पढ़ रही थी तब कॉर्नर में छपें हुए विज्ञापन पर मेरी नज़र गयी। मैंने वह विज्ञापन ध्यान से पढ़ा। उसमें लिखा था,' नासिक का पहला फूड फेस्टिव्हल' फूड फेस्टिव्हल पढ़कर मेरी आँखे चौंक गयी। अरे यार, पहला 'फूड फेस्टिव्हल' और हम औरतें क्यों न शामील हो! दिमाग में घंटी बजी और तुरंत विज्ञापन में दिए हुए फोन नंबर को घुमा दिया। फोन पर बहुत सारी जानकारी हासिल करनें के बाद मैंने सोचा, 'चलो, स्टॉल बुक कर ही लेतें हैं।' स्टॉल बुक करनें के बारे में किसी को पुछूँगी तो सब कहेंगे, "क्या जरूरत पड़ी हैं तुझे? घर में खाना बनाती हैं, इतना काफ़ी नहीं हैं।" औरतों को हमेशा सुननें में मिलनेवाली इन्हीं शब्दों से मेरी कभी नहीं पटती। इसलिए न आगा देखा न पिछा तुरंत स्टॉल बुक किया और स्टॉल पर कौनसे व्यंजन रखनें चाहिये इस काम में लग गयी।
पहले दिन पँकींग की हुयी चीजें रखनी थी तो मैंने अलग अलग तरह की चटणीयाँ और नमकीन बनाकर सौ सौ ग्राम के पँकेट बनवाकर स्टॉल पर रख दिये।
         दुसरे दिन प्याज के पकौड़े, सँडविच, आप्पे, बटाटेवडा और पालक चीला बनवायें।
स्टॉल पर आनेवाले सभी खवय्ये लोग आप्पे और पालक चीला नाम सुनकर सोच में पड़ जाते थ वो पहले दोनों व्यंजनों के बारे में पुछतें और फिर ऑर्डर देते थे।
      एक पालक चीला लेनेवाले ग्राहक दो या तीन पालक चीला खा के ही जाते थे। पालक चीला खानेवालें औरत हो या आदमी सभी ने मुझसे पालक चीला कैसे बनातें हैं इस बारे में पूछकर जानकारी लेते थे।
         दो बुढ़े दोस्त शाम सात बजें स्टॉल पर आते थे और पेटभर के पालक चीला, आप्पे खाते थे। वे दोनों साथ में खाली डिब्बा लाते थे और जाते समय डिब्बे में दो प्लेट पालक चीला, आप्पे भर के ले जाते थे। एक दिन मुझसे रहा नहीं गया। मैने उन दोनों को पूंंछ लिया,"अंकल, आप यहाँ खानें के बाद भी डिब्बे मे पँक कर के पालक चीला, आप्पे क्यूँ ले के जाते हैं? पालक चीला, आप्पे ठंडा खानें में मज़ा नहीं आता।" मेरी बात सुनकर दोनों अंकल ने जवाब दिया,"बेटी, तेरे हाथ से बनाए हुए पालक चिला और आप्पे ठंडा खानें का भी एक अलग मज़ा हैं। हम दोनों दोस्त हैं, हमारे बेटे अमेरिका में रहते हैं, हम दोस्त यहाँ आकर खा सकतें हैं लेकिन हम दोनों की पत्नीयाँ घुटनें के दर्द से परेशान हैं। अपनी अपनी स्वीट हार्ट के लिए पालक चीला, आप्पे डिब्बे में भरकर ले जाते हैं। रोज़ रोज़ मेस का खाना खा कर बोअर हो गए थे। तेरे हाथ से बनाया हुआ सँडविच, पकौड़े, बटाटेवडा, पालक चीला, आप्पे खा के हम खूश हो गए।"
      उन दोनों अंकल की बात सुनकर जितना अच्छा लगा उतना बुरा ही लगा। बुरा इसलिए लगा की, बुढ़ापे मे बच्चों के बिना अकेले रहना कितना मुश्कील होता हैं फिर भी अपनी अपनी ज़िदगी जीना ही हैं क्या करे। दोनों अंकल के लिए स्वास्थ्य भरी ज़िदगी की शुभकामनाएँ दी और मैं किसी अनज़ान लोगों को खानें के जरीए कुछ पल के लिए खुशियाँ दे सकी इसलिए अपनें आप को शाबाशी दे दी।
        आप भी खाना बनातें समय जिन लोगों ने आप के खानें की तारीफ़ की हैं, उन्हीं यादों को याद कर के खाना बनाईये। आप को खाना बनाना बोअरींग नहीं लगेगा। कर के तो देखिए और अपना अनुभव बताईये।

©ज्योत्स्ना पाटील 
       

Tuesday, 7 May 2019

गपशप

गपशप 


देश विदेश के सभी पाठक को मेरा सविनय प्रणाम।
भारत, युनायटेड स्टेटस्, युनायटेड किंगडम्, सिंगापूर, ऑस्ट्रेलिया, चीन, बहारीन और अननोन रिज़न के सभी पाठकों ने मेरे दोनों (मराठी और हिंदी) ब्लॉग पढ़कर मेरा हौसला बढ़ाया इसलिए सब को धन्यवाद देती हूँ।
           बहुत सारे पाठकों ने व्हॉट्सऍप पर कमेंट्स भेजें है और पूछा हैं की," हमनें ब्लॉग पर कमेंट्स भेजी लेकिन दिखायी नहीं दी।" इसलिए आप से निवेदन करती हूँ की, कमेंट्स लिखनें के बाद सामने दिखायी देनेवालें 'साईन आऊट' पर क्लिक ना करें। कमेंट्स के नीचे दिखायी देनेवालें 'पब्लिश' शब्द पर क्लिक करेंगे तब आप की कमेंट्स पब्लिश होगी और दिखायी देगी।
     आप सभी का प्यार मेरा लिखनें का हौसला बढ़ाता हैं इसिलिए मैं कोशिश करूँगी की आप को सुकून, शांंती और हेल्दी जिंदगी मिले। अपने आसपास तो अशांती और अविचार फैले हुए हैं। पूरी दुनिया ही तणाव में जी रहीं है इसिलिए अच्छा खानपान और अच्छे विचार आप तक पहुँचाने की कोशीश मैं हमेशा करूँगी।
        आज महाराष्ट्रा (भारत) में 'अक्षय्य त्त्रुतियाँ' का त्योहार मनाया जाता हैं। आज के दिन कि हुयी कामनाएँ हमेशा के लिए होती हैं और अक्षय्य रहती हैं।
       आज मैं कामना करती हूँ की आप सभी का जीवन स्वास्थ्यमय और शांती से भरा हुआ रहें। अक्षय्य तृतीया  की बहुत सारी शुभकामनाएँ।
      फिर से आप सभी को धन्यवाद देती हूँ।

Sunday, 5 May 2019

गपशप

गपशप 

सभी पाठकों को मेरा सलाम।
अहिंदी भाषिक होनें की वजह से मेरे लेखन में कुछ गलतियाँ तो जरूर हैं लेकिन भाषा एक ऐसा माध्यम हैं, जो इन्सानों को जोड़ने का कार्य करता हैं। हर एक भाषा दुसरी भाषा के शब्द अपनाकर ही सम्रुद्ध होती हैं। जैसे मराठी भाषा में अरबी, फार्सी, पोर्तुगीज, अंग्रेजी, हिंदी, कन्नड, गुजराती भाषा के बहुत सारे शब्द समाविष्ठ हो गए। मेरे कहनें का मतलब हैं की, अपने विचार दुसरों तक पहुँचाना इसी जुनून से मैं ब्लॉग लिखकर खाना बनवानें के तरीकें और खानपान से जुड़ी बाते आप से शेअर करती रहुँगी।
     आप सभी ने मेरा ब्लॉग पढ़कर मेरा हौसला बढाया इसलिए शुक्रीया।
       मेरी गलतियाँ आप बेझिझक लिखकर बताईये। मेरी रेसिपी फॉलो की तो कैसे बनीं इस के बारे मेंं लिखकर बताईये।
धन्यवाद।

गाजर टमाटर उत्तप्पा

 आज की रेसिपी - गाजर टमाटर उत्तप्पा सभी फूड़ी दोस्तों को नमस्ते। आज की रेसिपी सभी को जरूर पसंद आएगी क्योंकी हम दोसा, उत्तप्पा तो हमेशा खाते ह...