Tuesday, 14 May 2019

चवई की फल्ली (चवळीची भाजी)

चवई की फल्ली (चवळीची भाजी)
      आज की सब्जी बहुत ही कम और घर में आसानी से मिलनेवाली चीज़ों से बनायी हैं। चवई की फल्ली की सब्जी बनाने के लिए ज्यादा मसाले डालना उचित नहीं होता क्योंकी ज्यादा मसाले डालने से मूल सब्जी का स्वाद बदल जाता हैं। इसलिए कुछ सब्जीयाँ ऐसी होती हैं की उनका स्वाद बरकरार रखने के लिए कम मसाले से ही बनानी चाहिए।
        आज की रेसिपी की सामग्री में तेल और एक चीज (अमूल चीज नहीं, चीज मिन्स व्यंजन) मैने रखी नहीं हैं। आप को वह चीज ढुँढनी हैं। चलिये ढूँढिये और ढुँढते ढुँढते चवई की सब्जी बनाते हैं।
१) चवई की फल्ली के दानें निकालिये, कोमल फल्ली को छोटे छोटे टुकडों में काटिये।
फल्ली के टुकडें ओर दानों को मिक्स कर दिजिये।
२) मुँगफली के दानें भूनिये और उसकी पाउडर बना लिजिये।
३) नारियल, अदरक, लहसून की पेस्ट बना लिजिये।
४) गँस पर बर्तन रखिये और गर्म होने दिजिये।
५) गर्म बर्तन में तेल डालिये।
६) तेल गर्म होने पर जिरा, हिंग पाउडर, कढीपत्ता, नारियल, अदरक, लहसून पेस्ट डालिये और दो मिनट तक भूनिये।
७) पेस्ट सुनहरे रंग की होने पर गरम मसाला, लाल मिर्च पाउडर और हल्दी डालिये हिलाते हुये आधे मिनट तक तलिये।
८) सारे मसाले अच्छे से मिलाईये और चवई की फल्ली डालिये और हिलाईये।
९) चवई की फल्ली मसालों में भूनने के बाद गर्म पानी डाल दिजिये।
१०) चवई की फल्ली अच्छे से पकने दिजिये और मुँगफली की पाउडर, नमक, हरा धनिया डालिये।
११) पूरी तरह से सब्जी पकने के बाद सर्व्हिंग बाऊल में निकालिये और रोटी, भाकरी, चावल के साथ परोसिये।
          चलिये चवई की फल्ली तो बन गयी और आप को सहीं उत्तर ही मिल गया होगा।

         
           ग्रेव्ही की चवई की सब्जी आप खाईये और दुसरों को भी खिलाईये।

©ज्योत्स्ना पाटील 

Monday, 13 May 2019

लाल मिर्च की चटणी

 लाल मिर्च की चटणी

आज की रेसिपी मेरी धुलिया की नणंद कविता के किचन से हैं।
                    लाल मिर्च की चटणी
चटणी के लिए सामग्री ट्रे में रखी हुयी हैं, तेल मैंने रखा नहीं हैं। चटणी के लिये तेल चाहिये इसलिए आप तेल भी सामग्री में लिजिये। मुझे पालक चिला के साथ चटणी चाहिए थी और नाश्ता कर के आगे का सफ़र तय करना था इसलिए मुझे सुबह जल्दी से काम निपटाना था। आप चटणी के लिये सामग्री अपने हिसाब से ले सकते हैं।
सामग्री नापतौल के लेने के बजाए आप अपने हिसाब से लेकर खाना बनाना हमेशा फायदेमंद होता हैं। हर एक घर के लोगों की रूची अलग अलग स्वाद की होती हैं। किसी को खानें में तेल ज्यादा चाहिए तो किसी को कम तेल चाहिए। किसी को सब्जी के अनुसार तेल की मात्रा चाहिए। हर घर का खानपान का तरीका अलग अलग ढंग का होता हैं इसलिए आप लहसुन, अदरक, प्याज, मिर्च, नमक की मात्रा लिजिये और खाना बनाईये।
विधीः १) पहले मुँगफली के दानें अच्छे से भूनिये।
२) लाल मिर्च, लहसून, नमक और भूनें हुये मुँगफली के दानें, हरा धनिया मिक्सी के जार में डालकर पीस लिजिये।
३) कड़ाही को गँस पर रखिये और गर्म कीजिये।
४) कड़ाही में तेल डालिये, तेल गर्म होने पर जिरा, कडीपत्ते डालिये और पिसी हुयी लाल मिर्च डालिये। अच्छे से मिलाईये और गँस को बंद कर दिजिये।

५) लाल मिर्च की चटणी रोटी, भाकरी, पराठा, ब्रेड, डोसा, उत्तप्पा, चिला, पुरी, बटाटेवडा, पकौड़े के साथ खा सकते हैं।

©ज्योत्स्ना पाटील

Saturday, 11 May 2019

आप्पे

आप्पे 

आज मैं आप को कल की रेसिपी के बारे में कुछ बताना चाहती हूँ ।कल की रेसिपी हैं आप्पे।
आप्पे के लिए आज रात को ही सभी  दाल और चावल पानी में भिगोईये।
आज रात की तैयारी -  आधी कटोरी चावल, आधी कटोरी चणे की दाल, आधी कटोरी मूंग दाल, पाव कटोरी उडद दाल, पाव कटोरी तुवर दाल सभी मिक्स कर के रात भर पानी में भिगने दीजिए। आज के लिए इतनी तैयारी काफ़ी हैं ।कल नाश्ते के लिए आप्पे बनायेंगे चलो, मिलते हैं कल, शुभ रात्री ।   

                           आप्पे
१) अदरक, लहसुन छीलिये।
२) हरी मिर्च धोईये और काटिये
३) रातभर भिगोईयी हुई चावल, दाल, हरी मिर्च, अदरक, लहसून, जिरा, हल्दी पाउडर, हींग पाउडर, नमक, हरा धनिया मिक्सी के जार में डालकर एक साथ पीस लिजिये।
४) पीसे हुए दाल चावल के मिश्रण को बाउल में निकालकर दो घंटे रेस्ट करने के लिये रख दिजिये।
५) दो घंटे बाद मिश्रण में बेकिंग सोडा (खानें का सोडा) मिलाईये और अच्छी तरह से मिश्रण को हाथ से फेंट लिजिये।
६) आप्पे पात्र को गँस पर रखकर गर्म किजिए।
७) गरम किया आप्पे पात्र के सातों कटोरी में एक छोटा चम्मच तेल डालिये और एक एक चम्मच मिश्रण डाल दिजिये। उस के ऊपर ढक्कन रखकर पकने दिजिये।
८) आप्पे को पलटकर दुसरी बाजू ही पकने दिजिये।
९) दोनों तरफ से सुनहरे होने के बाद आप्पे प्लेट में निकाल लिजिये।
१०) चटणी या सॉस के साथ गरमागरम आप्पे खानें का आनंद लिजिये।
     आज का पौष्टिक, स्वादभरा नाश्ता खाईये और तंदुरुस्त रहिये।

©ज्योत्स्ना पाटील 

Friday, 10 May 2019

टमाटर पराठा (ठेपला)

           टमाटर पराठा (ठेपला)
चलो, आज फिर से वर्धा के छोटेसे किचन में बनायी हुई सिम्पलसी रेसिपी का स्वाद चखतें हैं।
टमाटर पराठा बनानें के लिए सामग्री,
सामग्रीः दो टमाटर, एक बड़ी कटोरी गेहुँ का आटा,एक छोटासा प्याज, चार-पाँच लहसून की कलियाँ, एक छोटासा टुकडा अदरक,एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर, पाव चम्मच हल्दी, थोडासा बारीक कटा हुआ हरा धनिया, तील(सेसमी सीडस्), एक टी स्पून पिसी हुई शक्कर, नमक स्वादानुसार, तेल
विधीः
१) प्याज छिलकर काट लिजिये।
२) प्याज, टमाटर, लहसून, अदरक की पेस्ट बनाईये।
३) एक बर्तन में गेहुँ का आटा, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, पिसी हुई शक्कर (पिसी हुई शक्कर घर में ना हो तो टमाटर के साथ शक्कर ग्राईंड कर लिजिये), तील हरा धनिया, एक चम्मच तेल डालकर अच्छे से मिलाईये।
४) गेहुँ के आटे में टमाटर, प्याज, अदरक, लहसून की पेस्ट मिलाईये और अच्छे से आटे को गूंथिये। जरूरत पड़ी तो थोड़ा सा पानी आटे में डाल सकते हो। वैसे तो टमाटर की पेस्ट में आटा गूंथा जाता हैं। अलग से पानी डालनें की जरूरत नहीं पड़ती।
५) गुंथे हुये आटे को गीले कपड़े से ढककर पंद्रह बीस मिनट तक रखिये।
६) गुंथे हुये आटे के छोटे छोटे आकार के गोले बनाइये।
७) गोले को चपाती के जैसा गोल आकार में बेलिये और गर्म तवे पर थोड़ा सा तेल लगाकर दोनो ओर सुनहरा होने तक सेकिये।
८) टमाटर पराठा चटणी, सॉस या आचार के साथ परोसिये।
चार पाँच साल के बच्चों को पराठा आठ हिस्सों में काट कर दिजिये क्योंकी बच्चों को हाथ से रोटी या पराठा तोडनें में दिक्कत आती हैं इसलिए बच्चे मँगी, पास्ता, पिझ्झा खाना ज्यादा पसंद करते हैं।
अपने बड़े बच्चे (पती) को मत काटकर परोसिये! अरे यार मैंने ऐसे ही मज़ाक में कह दिया। कभी कभी आप के पास समय हो तो उन्हें भी पराठा काटकर प्लेट में सज़ाकर दिजिये साथ में सलाड भी दिजिये।

©ज्योत्स्ना पाटील 

Thursday, 9 May 2019

नारियल की बर्फी

     नारियल की बर्फी

आज की रेसिपी  'नारियल की बर्फी'
आप सभी ने नारियल की बर्फी शादीं या त्योहार में खायी हैं। आप ने चखी हुयी बर्फी सॉफ्ट और दो या तीन दिन ही खा सकतें है लेकिन मैंने बनायी हुयी नारियल की बर्फी दस पंद्रह दिन रूम टेंम्परेचर में डिब्बे में भरकर रख सकते हैं और बर्फी खानें का आनंद लुटा सकते हैं।
आज की रेसिपी के लिए सामग्री चाहिए,
सामग्रीःः एक कटोरी कद्दूकस किया हुआ नारियल, डेढ कटोरी शक्कर, दूध आधा कप, देसी घी दो टेबल स्पून।
बहुत ही कम और हर घर में आसानी से मिलनेवाली सामग्री है। आप सामग्री लेकर तैयार रहिये, दोपहर के समय में हम नारियल की बर्फी बनानें की विधी जानते हैं।
विधीः
१) एक थाली को थोडासा घी (चिकनाई) लगा कर अलग रखिये।
२) कड़ाही में बचा हुआ घी गर्म कीजिये
३) घी में कद्दूकस किया हुआ नारियल डालकर धीमी आंच पर भूनिये। लगातार मिलाते रहिये।
४) नारियल थोडासा भूनने के बाद दूध डालकर लगातार मिलाते रहिये।
५) दूध डालने के बाद शक्कर मिला दिजिये और लगातार मिलाते रहिये। नीचे कड़ाही को मिश्रण लगना नहीं चाहिये।
६) जब मिश्रण में जालियाँ दिखायी देने लगे और मिश्रण का रंग सुनहरा दिखायी देने लगे तब गँस बंद कर दिजिये।
७) गँस बंद करते ही कड़ाही में से मिश्रण को घी लगी हुई थाली में डालिये। मिश्रण को फैलाकर जमाईये।
८) मनपसंद आकार में काटिये और ठंडा कर के डिब्बेंं में भर दिजिये। जब चाहो तब नारियल की बर्फी का आनंद ले सकते हो।
        मीठा खाओ, मीठा बोलो और खुशहाल रहो।

©ज्योत्स्ना पाटील 

Wednesday, 8 May 2019

आज सिर्फ सुनहरी यादें

         आज सिर्फ सुनहरी यादें
 
आज गुलजारजी का एक शेर याद आ रहा हैं। गुलजारजी कहतें हैं,
मिलता तो बहुत कुछ हैं इस जिंदगी में.......
बस हम गिनती उसी की करते हैं, जो हासिल ना हो सका।
      गुलजारजी की बातों पर गौर करते हुए आज हम सिर्फ अच्छी बातों को याद करेंगे और आज का दिन बेहतर बनाएँगें।
      अच्छी बातें बहुत सी हैं लेकिन हम खानपान से जुड़ी यादों का ही ज़िक्र करेंगे।
आज मैं आप से 'पालक चीला' से जुड़ी हुई यादें शेअर करूँगी।
         बीस साल पहले की बात हैं। मेरे पती दिलिपजी गोवा में रहते थे और मैं बच्चों के साथ नासिक में रहती थी। एक दिन अखबार पढ़ रही थी तब कॉर्नर में छपें हुए विज्ञापन पर मेरी नज़र गयी। मैंने वह विज्ञापन ध्यान से पढ़ा। उसमें लिखा था,' नासिक का पहला फूड फेस्टिव्हल' फूड फेस्टिव्हल पढ़कर मेरी आँखे चौंक गयी। अरे यार, पहला 'फूड फेस्टिव्हल' और हम औरतें क्यों न शामील हो! दिमाग में घंटी बजी और तुरंत विज्ञापन में दिए हुए फोन नंबर को घुमा दिया। फोन पर बहुत सारी जानकारी हासिल करनें के बाद मैंने सोचा, 'चलो, स्टॉल बुक कर ही लेतें हैं।' स्टॉल बुक करनें के बारे में किसी को पुछूँगी तो सब कहेंगे, "क्या जरूरत पड़ी हैं तुझे? घर में खाना बनाती हैं, इतना काफ़ी नहीं हैं।" औरतों को हमेशा सुननें में मिलनेवाली इन्हीं शब्दों से मेरी कभी नहीं पटती। इसलिए न आगा देखा न पिछा तुरंत स्टॉल बुक किया और स्टॉल पर कौनसे व्यंजन रखनें चाहिये इस काम में लग गयी।
पहले दिन पँकींग की हुयी चीजें रखनी थी तो मैंने अलग अलग तरह की चटणीयाँ और नमकीन बनाकर सौ सौ ग्राम के पँकेट बनवाकर स्टॉल पर रख दिये।
         दुसरे दिन प्याज के पकौड़े, सँडविच, आप्पे, बटाटेवडा और पालक चीला बनवायें।
स्टॉल पर आनेवाले सभी खवय्ये लोग आप्पे और पालक चीला नाम सुनकर सोच में पड़ जाते थ वो पहले दोनों व्यंजनों के बारे में पुछतें और फिर ऑर्डर देते थे।
      एक पालक चीला लेनेवाले ग्राहक दो या तीन पालक चीला खा के ही जाते थे। पालक चीला खानेवालें औरत हो या आदमी सभी ने मुझसे पालक चीला कैसे बनातें हैं इस बारे में पूछकर जानकारी लेते थे।
         दो बुढ़े दोस्त शाम सात बजें स्टॉल पर आते थे और पेटभर के पालक चीला, आप्पे खाते थे। वे दोनों साथ में खाली डिब्बा लाते थे और जाते समय डिब्बे में दो प्लेट पालक चीला, आप्पे भर के ले जाते थे। एक दिन मुझसे रहा नहीं गया। मैने उन दोनों को पूंंछ लिया,"अंकल, आप यहाँ खानें के बाद भी डिब्बे मे पँक कर के पालक चीला, आप्पे क्यूँ ले के जाते हैं? पालक चीला, आप्पे ठंडा खानें में मज़ा नहीं आता।" मेरी बात सुनकर दोनों अंकल ने जवाब दिया,"बेटी, तेरे हाथ से बनाए हुए पालक चिला और आप्पे ठंडा खानें का भी एक अलग मज़ा हैं। हम दोनों दोस्त हैं, हमारे बेटे अमेरिका में रहते हैं, हम दोस्त यहाँ आकर खा सकतें हैं लेकिन हम दोनों की पत्नीयाँ घुटनें के दर्द से परेशान हैं। अपनी अपनी स्वीट हार्ट के लिए पालक चीला, आप्पे डिब्बे में भरकर ले जाते हैं। रोज़ रोज़ मेस का खाना खा कर बोअर हो गए थे। तेरे हाथ से बनाया हुआ सँडविच, पकौड़े, बटाटेवडा, पालक चीला, आप्पे खा के हम खूश हो गए।"
      उन दोनों अंकल की बात सुनकर जितना अच्छा लगा उतना बुरा ही लगा। बुरा इसलिए लगा की, बुढ़ापे मे बच्चों के बिना अकेले रहना कितना मुश्कील होता हैं फिर भी अपनी अपनी ज़िदगी जीना ही हैं क्या करे। दोनों अंकल के लिए स्वास्थ्य भरी ज़िदगी की शुभकामनाएँ दी और मैं किसी अनज़ान लोगों को खानें के जरीए कुछ पल के लिए खुशियाँ दे सकी इसलिए अपनें आप को शाबाशी दे दी।
        आप भी खाना बनातें समय जिन लोगों ने आप के खानें की तारीफ़ की हैं, उन्हीं यादों को याद कर के खाना बनाईये। आप को खाना बनाना बोअरींग नहीं लगेगा। कर के तो देखिए और अपना अनुभव बताईये।

©ज्योत्स्ना पाटील 
       

Tuesday, 7 May 2019

पालक चिला (पालक धिरडे)

पालक चिला (पालक धिरडे)
आज की रेसिपी इन्ही सामग्री से बनाएँगें। बहुत ही कम सामग्री से हेल्दी नाश्ता बनवानें की रेसिपी दोपहर में लिखूँगी तब तक आप सामग्री जुटा लिजिये। आज का व्यंजन हैं 'पालक चीला' मराठी में इसे 'पालक धिरडे' कहते हैं। चलिये, मिलते हैं दोपहर को।
           चलिये, पालक चीला बनानें के लिए
१) पहले पालक अच्छेंं से साफ कीजिये और पालक के पत्तें गर्म पानी से धो लिजिये।
२) पालक, प्याज, हरी मिर्च, अदरक, छोटे छोटे टुकडों में काट लिजिये ताकि पालक की प्युरी अच्छेंं से फाइन पेस्ट बन जाए।
३) मिक्सी के जार में पालक, प्याज, हरी मिर्च, अदरक, लहसून, जीरा, नमक, हल्दी डाल दिजिये और अच्छी तरह से फाईन पेस्ट बना लिजिये। पेस्ट बनाते समय पानी की जरूरत नहीं पड़ती।

४) पेस्ट बनाने के बाद बाऊल में निकालिये और उसमें चणे का आटा डाल दिजिये।

५) पालक की पेस्ट में चणे का आटा अच्छेंं से मिला लिजिये।
६) पालक और चणे के आटे का बँटर बनानेंं के लिए जरूरत पड़ी तो थोडासा पानी मिलाकर स्मूथ बॅटर बना लिजिये।


७) पालक और आटे का स्मूथ बॅटर बनानें के बाद चम्मच से अच्छी तरह से फैंट लिजिये।
८) गँस पर तवा या पँन रखकर गरम कीजिये।
९) गरम किये हुए पँन पर एक चम्मच तेल डालिये और चारों ओर लगा दिजिये।
१०) पँन को तेल लगाने के बाद एक कटोरी में बॅटर लेकर डोसे जैसे फैला दिजिये।
११) पालक चिला (धिरडे) दोनों तरफ़ से सेकनें के बाद प्लेट में सर्व्ह कीजिये।
१२) पालक चिला कौनसी भी चटणी, सॉस या आचार के साथ परोसिये।
टिपः चणें के आटे के साथ दुसरे आटे मिलाकर भी बॅटर बना सकतें हैं। चणें के आटे में मकई का आटा, चणें के आटे में चावल का आटा मिला सकतें हैं।
         मेरे वर्धा के किचन में बहुत ही कम चीजें उपलब्ध होती है। इसिलिए कुछ चीजें इस में नहीं हैं लेकिन आप हिंग, हरा धनिया इस बॅटर में मिला सकते हैं।

गाजर टमाटर उत्तप्पा

 आज की रेसिपी - गाजर टमाटर उत्तप्पा सभी फूड़ी दोस्तों को नमस्ते। आज की रेसिपी सभी को जरूर पसंद आएगी क्योंकी हम दोसा, उत्तप्पा तो हमेशा खाते ह...