Tuesday, 7 May 2019

गपशप

गपशप 


देश विदेश के सभी पाठक को मेरा सविनय प्रणाम।
भारत, युनायटेड स्टेटस्, युनायटेड किंगडम्, सिंगापूर, ऑस्ट्रेलिया, चीन, बहारीन और अननोन रिज़न के सभी पाठकों ने मेरे दोनों (मराठी और हिंदी) ब्लॉग पढ़कर मेरा हौसला बढ़ाया इसलिए सब को धन्यवाद देती हूँ।
           बहुत सारे पाठकों ने व्हॉट्सऍप पर कमेंट्स भेजें है और पूछा हैं की," हमनें ब्लॉग पर कमेंट्स भेजी लेकिन दिखायी नहीं दी।" इसलिए आप से निवेदन करती हूँ की, कमेंट्स लिखनें के बाद सामने दिखायी देनेवालें 'साईन आऊट' पर क्लिक ना करें। कमेंट्स के नीचे दिखायी देनेवालें 'पब्लिश' शब्द पर क्लिक करेंगे तब आप की कमेंट्स पब्लिश होगी और दिखायी देगी।
     आप सभी का प्यार मेरा लिखनें का हौसला बढ़ाता हैं इसिलिए मैं कोशिश करूँगी की आप को सुकून, शांंती और हेल्दी जिंदगी मिले। अपने आसपास तो अशांती और अविचार फैले हुए हैं। पूरी दुनिया ही तणाव में जी रहीं है इसिलिए अच्छा खानपान और अच्छे विचार आप तक पहुँचाने की कोशीश मैं हमेशा करूँगी।
        आज महाराष्ट्रा (भारत) में 'अक्षय्य त्त्रुतियाँ' का त्योहार मनाया जाता हैं। आज के दिन कि हुयी कामनाएँ हमेशा के लिए होती हैं और अक्षय्य रहती हैं।
       आज मैं कामना करती हूँ की आप सभी का जीवन स्वास्थ्यमय और शांती से भरा हुआ रहें। अक्षय्य तृतीया  की बहुत सारी शुभकामनाएँ।
      फिर से आप सभी को धन्यवाद देती हूँ।

Monday, 6 May 2019

पालक मसाला खिचडी

           पालक मसाला खिचडी
हम लोग नासिक से वर्धा आए और यहाँ घर में खाली दस बारह बर्तन में ही सबकुछ करना पड़ता हैं। वहाँ नासिक में बर्तनो से घर भरा हुआ हैं और यहाँ पे कुछ अलग ही माहौल हैं।
खाना बनवातें समय पहले बर्तनों को और घर में बची हुई सब्जीयों के बारे में सोचकर आज कौनसा व्यंजन बनवाना हैं, यह सोचना पड़ता हैं।


जो कुछ घर मे सामग्री थी उसी से पालक मसाला खिचडी बनायी। यहाँ वर्धा में आठ-दस दिन का आना जाना रहता हैं इसिलिए मैने इंडक्शन स्टोव्ह पर ही खाना बनाती हुँ।
                 उपर प्लेट में रखी हुयी सामग्री में तेल और नमक नहीं हैं।
तेल गरम होने के बाद प्लेट में रखी हुयी पालक और हरा धनिया छोड़कर सारी चीजें एक एक कर के तेल में डाल दी। सारी चीजें अच्छी तरह से भुननें के बाद चावल, मसूर की दाल डालकर गरम पानी डाला और दस मिनट पकनें दिया।
दस मिनट पकने के बाद पालक और हरा धनिया डाल दिया।
स्वादानुसार नमक डालकर प्रेशर कुकर का ढक्कन लगाकर धीमी आंच पर पाँच मिनट (कुकर की सिटी बज़े या न बज़े फिर भी गँस बंद करना मत भूलियें) रखा और इंडक्शन स्टोव्ह बंद कर दिया।
            एक प्लेट में खिचडी सर्व्ह की और दिलिप को खाना खानें के लिए आवाज़ दी तो सामने आयी हुयी प्लेट देखकर खूश हो गए और खाना बनाने की  मेरी मेहनत काम आ गई।
आज पालक मसाला खिचडी सामने सामग्री रखकर कैसे बनायी जाए। इस के बारे में लिखनें की कोशीश की हैं। अलग एक्सस्पिरीमेंट कर के रेसिपी लिखी हैं। आप भी आप के हिसाब से सामग्री लेकर पालक मसाला खिचडी बनाईये और उस के बारे में जरूर लिखकर बताईये।
धन्यवाद।
टिपः मसूर की दाल के बदले आप तुवर दाल, मुँग दाल ले सकते हैं। मैंनै घर में जो दाल थी उसी से काम चला लिया                          
धन्यवाद
©ज्योत्स्ना पाटील 

Sunday, 5 May 2019

गपशप

गपशप 

सभी पाठकों को मेरा सलाम।
अहिंदी भाषिक होनें की वजह से मेरे लेखन में कुछ गलतियाँ तो जरूर हैं लेकिन भाषा एक ऐसा माध्यम हैं, जो इन्सानों को जोड़ने का कार्य करता हैं। हर एक भाषा दुसरी भाषा के शब्द अपनाकर ही सम्रुद्ध होती हैं। जैसे मराठी भाषा में अरबी, फार्सी, पोर्तुगीज, अंग्रेजी, हिंदी, कन्नड, गुजराती भाषा के बहुत सारे शब्द समाविष्ठ हो गए। मेरे कहनें का मतलब हैं की, अपने विचार दुसरों तक पहुँचाना इसी जुनून से मैं ब्लॉग लिखकर खाना बनवानें के तरीकें और खानपान से जुड़ी बाते आप से शेअर करती रहुँगी।
     आप सभी ने मेरा ब्लॉग पढ़कर मेरा हौसला बढाया इसलिए शुक्रीया।
       मेरी गलतियाँ आप बेझिझक लिखकर बताईये। मेरी रेसिपी फॉलो की तो कैसे बनीं इस के बारे मेंं लिखकर बताईये।
धन्यवाद।

पालक खिचडी (हरीभरी खिचडी)

              पालक खिचडी (हरीभरी खिचडी)

सामग्रीः
पालक...................एक कटोरी
चावल....................एक कटोरी
तुवर दाल................आधी कटोरी
प्याज......................एक मध्यम आकार का
लहसून....................पाँच छह कलियाँ
तेज पत्ते....................दो
तेल .........................दो बड़े चम्मच
राई दाना...................एक छोटा चम्मच
जीरा.........................एक छोटा चम्मच
हींग...........................पाव चम्मच
मुँगफली के दानें...........पाव कटोरी
हरी मिर्च......................तीन
अदरक........................छोटासा टुकडा
कसा हुआ नारियल.........पाव कटोरी
कटा हुआ हरा धनिया.......पाव कटोरी
नमक.............................स्वादानुसार

विधीः
१) चावल को साफ़ कीजिये, धोइयेःः
२) तुवर दाल को साफ़ कीजिये, धोइये।
३) प्याज को छीलिये और लंबे आकार में काटिये।
४) अद्रक, लहसुन, हरी मिर्च की पेस्ट बना लिजिये।
५) एक बर्तन में तेल को गरम कीजिये, राई दाना और जीरा डालिये, हींग डालिये, तेज़पत्ता  डालिये और एक मिनट तक हिलाते हुये भूनिये। प्याज सुनहरे होने के बाद अदरक,लहसुन, मिर्च की पेस्ट डालिये और भूनिये। मुँगफली के दाने, हल्दी डालिये और चावल, दाल डालिये और अच्छी तरह से हिलाईये, पकाने के हिसाब से गर्म पानी डालिये और बर्तन पर ढक्कन रखकर धीमी आंच पर दस मिनट पकने दिजिये।
६) दस मिनट बाद ढक्कन निकालकर कटा हुआ पालक ,नमक डालिये, अच्छे से मिलाईये और फिर से ढक्कन रखकर पाँच मिनट पकाईये।
७) खिचडी पकने के बाद सर्हिंग बाऊल में निकालिये कसा हुआ नारियल और हरे धनिये से सजाकर गर्म परोसिये।
टिपः देसी घी डालकर खिचडी का स्वाद लिजिये।

©ज्योत्स्ना पाटील

Friday, 3 May 2019

सब्जीवाली खिचडी की सज़ा

         सब्जीवाली खिचडी की सज़ा
           पूरे भारत में खिचडी खानेवालों की कमी नहीं हैं। खिचडी का नाम लेते ही दाल चावल आँखो के सामने आ जाते हैं लेकीन बचपन में माँ के घर जो खिचडी बनती थी वो खिचडी मुझे पूरी सब्जी मंडी की याद दिला देती हैं। माँ के घर की खिचडी का सब्जी मंडी से नाता जुड़ने की वजह कुछ अलग ही हैं।
         मेरे पिताजी ब्राम्हणगांव (जि. नासिक,महाराष्ट्र) में रहते थे। वहाँ वे शिक्षक की नौकरी करते थे। मेरे पिताजी को गाँव के लोग कहते थे,"सरजी,हमारे बच्चों की ट्यूशन लिजिये।" मेरे पिताजी को 'ट्यूशन' के नाम से ही नफ़रत थी।
मेरे पिताजी गाँव के लोगों को कहतें थे, "मैं जो विषय बच्चों को पढ़ाता हुँ, उस विषय की ट्यूशन लगाने की कोई जरूरत नहीं।" पिताजी की बात सुनकर गाँव के लोग कहतें थे, "आप के विषय बच्चों को पढ़ानें की जरूरत नहीं हैं, यह हम जानते हैं। बच्चों को दुसरें विषय तो आप पढ़ा सकते हैं।" गाँववाले जिद पर उतर गये तब पिताजी ने कहा, "मैं ट्यूशन लेने के लिए तैय्यार हुँ लेकीन मेरी ट्यूशन का फिक्स समय नहीं रहेगा और मैं ट्यूशन के पैसे नहीं लुँगा।
         पिताजी की शर्ते मानकर गाँववाले बच्चों को हमारे यहाँ ट्यूशन के लिए भेजने लगे और सारी सब्जी मंडी हमारे घर आ के बैठ गयी। गाँववाले भी बहुत होशियार थे। सर, ट्यूशन की फीस नहीं लेते हैं तो वे अपने खेती में जो अनाज़ उपजता था, वो अनाज, सब्जीयाँ ,फल, दूध घर भेज देते थे।
         कभी कभी एक ही सब्जी चार पाँच बच्चे ले आते तब वो सब्जी गली में दुसरे घरों में बाँटकर ही बहुत सारी बचती थी तब मेरी माँ एक बार सब्जी बनाती और बची हुयी सब्जी सिधे खिचडी मे डाल देती थी। इसलिए हमारे यहाँ गोबी खिचडी, पालक खिचडी, मटार खिचडी, बीन्स की खिचडी, दुधी की खिचडी, सिमला मिरची की खिचडी, टमाटर खिचडी, फुलवर की खिचडी ऐसी बहुत सारी सब्जीयाँ खिचडी में दाल चावल के साथ झिम्मा खेलती थी। हम माँ को कहतें थे, "अच्छा हैं, सब्जी के कारण अपने दाल चावल तो बच जाते हैं।" सभी हँसनें लगते। 'ज्ञान बाँटनें के लिए होता हैं, पैसा कमानें के लिए नहीं'  पिताजी की यही सोच की शिक्षा हम सब को सब्जीवाली खिचडी खाकर मिलती थी पर हमें पिताजी की सोच पर गर्व था , हैं और रहेगा। आज की बाजारू शिक्षा प्रणाली को देखकर हम मेरे पिताजी को शत शत प्रणाम करते हैं।
     खिचडी से जुड़ी बहुत सारी बातें है। आज के लिए इतना ही।

©ज्योत्स्ना पाटील 

Thursday, 2 May 2019

pickle

                                                                 आचार 
                       गर्मी के दिन हैं और खानें में आचार ना हो तो खाना खानें में मज़ा नही आता। आज इसी बहाने आचार बनाने की विधी जाननें की कोशीश करते हैं।
          एक दिन मेरी सहेली सुनिता कुलकर्णी मेरे घर आयी थी तब मेज़ पर रखी हुई आम के आचार की बरनी को देखकर बोली, " अरे वा! नया आचार।" उसके मुँह से 'नया आचार' सुनकर मैं हँसकर बोली, आचार भी नया, पुराना होता हैं क्या?" मेरी हँसी को नज़रअंदाज कर के सुनिता रौब ज़माते हुए बोली,"तू बाद में हँसती रह, पहले मुझे आचार चखने दे, मेरे मुँह मे पानी आ रहा हैं। झट से एक प्लेट और चम्मच दे, मुझे आचार चखना हैं।" सुनिता ने रोटी के साथ आम का आचार खाया और बोली, "मुझे कुछ मत कहना, इस साल मुझे तेरे  ही हाथ से आचार बनवाना हैं। तुम जब भी नासिक में रहेगी तब मुझे बता देना। मैं सारी सामग्री लाकर रखुँगी।"
         आज की 'आम के आचार' की रेसिपी आप के साथ शेअर करनें का मौका सुनिता की जिद की वज़ह से मिला इसलिए आज की रेसिपी मैं सुनिता को डेडिकेट करती हुँ।
        
  आम का आचार
सामग्रीः  दो कच्चे आम, एक कटोरी दरदरा पिसी हुई लाल मिर्च पाउडर, आधी कटोरी सरसों (राई) की दाल, एक टी स्पून मेथी दाना, तीन टेबल स्पून सौंफ, चार पाँच लौंग, चार पाँच काली मिर्च, छोटासा टुकडा दालचिनी का, एक टी स्पून हिंग पाउडर, एक टेबल स्पून हल्दी पाउडर, तीन टेबल स्पून धनिया पाउडर, पाव कटोरी नमक, पाव कटोरी शक्कर, डेढ कटोरी तेल
बनाने की विधीः  मेथी दाना, सौंफ, दालचिनी एकसाथ पिस लिजिये। मेथी दाना,सौंफ, दालचिनी पिसने के बाद उसमे सरसों की दाल डालकर फिरसे थोडासा पिस लिजिये।
                   तेल गर्म कर के उसमे लौंंग, काली मिर्च डाल दिजिये। लौंग, काली मिर्च गर्म तेल में डालने के बाद तेल के उपर आ गयी तो समझ लेना तेल अच्छी तरह से गर्म हुआ हैं। गर्म किया हुआ तेल ठंडा होने दिजिये।
         लाल मिर्च पाउडर, धना पाउडर, हल्दी पावडर, हिंग पाउडर, पिसी हुयी (सरसो, मेथी दाना,सौंफ,दालचिनी) पाउडर, नमक, शक्कर अच्छी तरह से मिला लिजिये और गर्म किया हुआ तेल ठंडा होने के बाद डालकर सब मसाला अच्छी तरह से मिला लिजिये।
                    आम अच्छी तरह से साफ कर के छोटे छोटे टुकडों में काट लिजिये। आम के टुकडे तैय्यार किये मसाले में मिला दिजिये। बडे चम्मच से अच्छी तरह से उपर नीचे कर के मिक्स कर लिजिये।
टिपः लौंग, काली मिर्च, दालचिनी घर में नही हैं तो कोई बात नहीं। इन चिजों के बिना ही आचार बना सकतें हो।


©ज्योत्स्ना पाटील         
               

Wednesday, 1 May 2019

पोहा और बच्चों की संवेदना

सभी पाठ़कोंं को मेरा प्रणाम।
          पोहा और बच्चों की संवेदना
महाराष्ट्रा में सभी जगह पर सुबह के नाश्ते में उपमा, मिसल और पोहा खाया जाता हैं वैसे तो इडली, डोसा, वडा सांभार, सँडविच, छोले भटुरे भी खाते हैं लेकीन ज्यादा तर पोहा, उपमा खाते हैं।
मेरे पती और बच्चे जिस दिन आराम से नाश्ता करते हैं उस दिन मैं नाश्ते की प्लेट सजाकर देती हूँ। दो दिन की छुट्टी थी तो बच्चे घर आए थे सुबह आराम से उठे ब्रश करके सीधे चाय पिने बैठे और बातें करने बैठ गयें। मैने देखा तो अब ये तीनो दो घंटे तक उठनें का नाम नहीं लेंगे मेरे मन ने कहाँ 'चल ज्योत्स्ना, तू चल तेरे  काम पर इनके साथ बैठकर कुछ नहीं होगा क्योंकी ए चिल्लाचिल्लाकर बातें करके थक जायेंगे और बाद में तुझंपर ही चिल्लायेंगे,' "मम्मी भूक लगी, जल्दी नाश्ता दो।" तीनो का बातें करने का मूड देखकर मैं सीधे नाश्ता बनाने के लिए रसोई में गयी। आज नाश्ता आराम से देना था इसलिए मैने पोहा बनाकर प्लेट सजायी।
दिलिप को और बेटा, बेटी तीनो के हाथ में नाश्ते की प्लेट थमा दी। प्लेट की तरफ देखकर मेरा बेटा स्वप्नील बोला, "मम्मी, प्लेट को देखकर खाने का दिल कर रहा हैं लेकीन सजाये हुए पोहा को तोडने का दिल नहीं करता। बेटे की बात सुनकर बहुत अच्छा लगा क्योंकी बेजान चिजों को तोडने का दिल नहीं होता तब मेरा बेटा दुसरे के दिल को तोडने के बारे में सौ बार सोचेगा। किसी के आँगन में रंगोली हो और उस रंगोली पर किसी ने पैर रखकर रंगोली बिघाड दी तो मेरे बेटे और बेटी को बहुत ही बुरा लागता हैं, तब दोनों के मुँह से एक ही बात निकलती हैं, "कौन बेवकूफ था। उसे रंगोली दिखायी नहीं दी क्या!" बच्चे संवेदनशील होना यहीं धनदौलत हैं। 

©ज्योत्स्ना पाटील                

गाजर टमाटर उत्तप्पा

 आज की रेसिपी - गाजर टमाटर उत्तप्पा सभी फूड़ी दोस्तों को नमस्ते। आज की रेसिपी सभी को जरूर पसंद आएगी क्योंकी हम दोसा, उत्तप्पा तो हमेशा खाते ह...