इंदौर की मिठाई 'गजक'
mykitchenjd के किचन से आज इंदौर की मिठाई बनाते है। इंदौरी मिठाई का नाम है 'गजक'।
आठ दिन पहले मेरे पती पूना गए थे। मेरी छोटी देवरानी भावना ने मेरे पती के हाथों मिठाई भेजी तब मैने उसे कॉल कर के पूछा, "यह मिठाई कहाँ से खरीदी?" तब उन्होंने कहा, "दीदी, इंदौर से बाली आयी थी, उन्होंने इंदौर से सबके लिए मिठाई लायी थी।" बाली ने भेजी हुयी मिठाई खाने के बाद मैने सोचा, चलो, बहुत दिनों से 'गजक' नही बनाया। आज बना के देखते है।
'गजक' बनाते समय मुझे हमेशा दो कहावतें याद आती है। मराठी की बोलीभाषा 'अहिराणी भाषा' में कहते है,
१) काम नहीं ते काय करू, नवं लुगडं दांडे करू.
२) ईया मोडीन खिया कया.
mykitchenjd के किचन से 'गजक' की रेसिपी पढ़कर आप को दो कहावतों का मतलब ध्यान में जरूर आएगा। तो चलिए, पहले रेसिपी बनाकर देखते है।
mykitchenjd के किचन से 'गजक' बनाने के लिए सामग्री चाहिए,
सामग्रीः एक कटोरी तिल, एक कटोरी गूड, दो टेबल स्पून घी एक टी स्पून बेकींग पाउडर।
mykitchenjd के किचन से 'गजक' बनाने की विधिः
१) गँस ऑन किजिये और पँन को गरम होने दिजिये।
२) पँन में तिल डालिये और धीमी आँचपर भून लिजिये।
३) तिल को ठंडा होने दिजिये।
४) पँन मे पाव कटोरी पानी डालिए और ऊबलने दिजिये।
५) पानी ऊबलते ही गूड डालिये।
६) गूड को पिघलने दिजिये। गाढा होने तक हिलाते रहिए।
७) गूड की गाढ़ी चाचणी बनते ही घी और बेकींग पाउडर डालिये।
८) घी, बेकींग पाउडर को अच्छे से मिक्स किजिये और तिल डालकर लगातार हिलाते रहिए और मिश्रण गाढ़ा होते ही घी लगाए हुए प्लेट (प्लेट के नीचे की तरफ से घी से ग्रीस किजिये) पर डालिए और बेलन से बेलिए।
९) तिल की मीठी रोटी बनाकर ठंडी होने दिजिये।
१०) तिल की मिठी रोटी को ठंडा होने के बाद छोटे छोटे टुकडे किजिये।
११) सभी टुकडों को मिक्सी के जार में डालिये, एक टेबल स्पून घी के साथ पीस लिजिये, स्मूथ पाउडर बनाईए।
१२) ट्रे के ऊपर बटर पेपर रखिए।
१३) ट्रे में बटर पेपर पर तिल गूड की स्मूथ पाउडर डालिए और चारों तरफ से प्रेस (दबाईए) किजिये।
१४) अच्छे से प्रेस किए हुए तिल गूड के मिश्रण को चौकोर या मनचाहा आकार में काटिये।
१५) अब ट्रे में से बटर पेपर को उठाईए और प्लेट पर रखिए और गजक की बर्फी को हल्के हाथों से एक एक कर के डिब्बें मे रखिए।
mykitchenjd के किचन से 'गजक' का आस्वाद चखनें के लिए आप भी बनाईए।
टिपः ड्रायफ्रूटस की कतरन ऐच्छिक है। घर में उपलब्ध हो तो डालिए।
मेरी दो कहावतों का मतलब अब ध्यान में जरूर आया होगा। क्योंकी अच्छी खासी तिल की क्रंची रोटी को तोडना और फिर से 'गजक' बनाना। सच कहूँ मुझे ऐसा लगता हैं की, पहले के जमानें में त्यौहार की मिठाई बनाने का काम बुढी दादी बनाती थी। दादी ने जब तिल की क्रंची रोटी बनायी तब दाँत न होने के कारण दादी माँ मिठाई खा नहीं सकी तब इस रेसिपी की खोज किसी दादी माँ ने की होगी, ऐसा मुझे लगता है। चलो, दादी माँ की खोज अच्छी और मीठी हैं, मुँह में डालते ही घुल जानेवाली मिठाई बहुत ही बढीयाँ है।
©ज्योत्स्ना पाटील.
mykitchenjd के किचन से आज इंदौर की मिठाई बनाते है। इंदौरी मिठाई का नाम है 'गजक'।
आठ दिन पहले मेरे पती पूना गए थे। मेरी छोटी देवरानी भावना ने मेरे पती के हाथों मिठाई भेजी तब मैने उसे कॉल कर के पूछा, "यह मिठाई कहाँ से खरीदी?" तब उन्होंने कहा, "दीदी, इंदौर से बाली आयी थी, उन्होंने इंदौर से सबके लिए मिठाई लायी थी।" बाली ने भेजी हुयी मिठाई खाने के बाद मैने सोचा, चलो, बहुत दिनों से 'गजक' नही बनाया। आज बना के देखते है।
'गजक' बनाते समय मुझे हमेशा दो कहावतें याद आती है। मराठी की बोलीभाषा 'अहिराणी भाषा' में कहते है,
१) काम नहीं ते काय करू, नवं लुगडं दांडे करू.
२) ईया मोडीन खिया कया.
mykitchenjd के किचन से 'गजक' की रेसिपी पढ़कर आप को दो कहावतों का मतलब ध्यान में जरूर आएगा। तो चलिए, पहले रेसिपी बनाकर देखते है।
mykitchenjd के किचन से 'गजक' बनाने के लिए सामग्री चाहिए,
सामग्रीः एक कटोरी तिल, एक कटोरी गूड, दो टेबल स्पून घी एक टी स्पून बेकींग पाउडर।
mykitchenjd के किचन से 'गजक' बनाने की विधिः
१) गँस ऑन किजिये और पँन को गरम होने दिजिये।
२) पँन में तिल डालिये और धीमी आँचपर भून लिजिये।
३) तिल को ठंडा होने दिजिये।
४) पँन मे पाव कटोरी पानी डालिए और ऊबलने दिजिये।
५) पानी ऊबलते ही गूड डालिये।
६) गूड को पिघलने दिजिये। गाढा होने तक हिलाते रहिए।
७) गूड की गाढ़ी चाचणी बनते ही घी और बेकींग पाउडर डालिये।
८) घी, बेकींग पाउडर को अच्छे से मिक्स किजिये और तिल डालकर लगातार हिलाते रहिए और मिश्रण गाढ़ा होते ही घी लगाए हुए प्लेट (प्लेट के नीचे की तरफ से घी से ग्रीस किजिये) पर डालिए और बेलन से बेलिए।
९) तिल की मीठी रोटी बनाकर ठंडी होने दिजिये।
१०) तिल की मिठी रोटी को ठंडा होने के बाद छोटे छोटे टुकडे किजिये।
११) सभी टुकडों को मिक्सी के जार में डालिये, एक टेबल स्पून घी के साथ पीस लिजिये, स्मूथ पाउडर बनाईए।
१२) ट्रे के ऊपर बटर पेपर रखिए।
१३) ट्रे में बटर पेपर पर तिल गूड की स्मूथ पाउडर डालिए और चारों तरफ से प्रेस (दबाईए) किजिये।
१४) अच्छे से प्रेस किए हुए तिल गूड के मिश्रण को चौकोर या मनचाहा आकार में काटिये।
१५) अब ट्रे में से बटर पेपर को उठाईए और प्लेट पर रखिए और गजक की बर्फी को हल्के हाथों से एक एक कर के डिब्बें मे रखिए।
mykitchenjd के किचन से 'गजक' का आस्वाद चखनें के लिए आप भी बनाईए।
टिपः ड्रायफ्रूटस की कतरन ऐच्छिक है। घर में उपलब्ध हो तो डालिए।
मेरी दो कहावतों का मतलब अब ध्यान में जरूर आया होगा। क्योंकी अच्छी खासी तिल की क्रंची रोटी को तोडना और फिर से 'गजक' बनाना। सच कहूँ मुझे ऐसा लगता हैं की, पहले के जमानें में त्यौहार की मिठाई बनाने का काम बुढी दादी बनाती थी। दादी ने जब तिल की क्रंची रोटी बनायी तब दाँत न होने के कारण दादी माँ मिठाई खा नहीं सकी तब इस रेसिपी की खोज किसी दादी माँ ने की होगी, ऐसा मुझे लगता है। चलो, दादी माँ की खोज अच्छी और मीठी हैं, मुँह में डालते ही घुल जानेवाली मिठाई बहुत ही बढीयाँ है।
©ज्योत्स्ना पाटील.
















